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स्विगी ने ‘मॉम’एंटम 2.0’ नीति की शुरुआत की, मातृत्व यात्रा को मिलेगा संरचित समर्थन

सामना संवाददाता / मुंबई 

भारत के अग्रणी ऑन-डिमांड सुविधा प्लेटफॉर्म स्विगी ने अपनी पैरेंटल केयर पॉलिसी में एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘मॉम’एंटम 2.0’ कार्यक्रम की शुरुआत की है। यह एक विस्तृत, बहुवर्षीय पहल है, जिसका उद्देश्य मातृत्व के विभिन्न चरणों में महिलाओं को समग्र समर्थन प्रदान करना है।

स्विगी के मुख्य मानव संसाधन अधिकारी गिरीश मेनन ने इस पहल की घोषणा करते हुए कहा, “समावेशिता सिर्फ लैंगिक विविधता से कहीं आगे की बात है। यह एक ऐसे कार्यस्थल के निर्माण की दिशा में प्रयास है, जहां महिलाएं करियर और परिवार—दोनों के बीच संतुलन बना सकें और खुद को हर मोर्चे पर समर्थ महसूस करें।”

गिरीश मेनन ने बताया कि स्विगी में बीते 11 वर्षों में महिलाओं ने जटिल चुनौतियों का समाधान करते हुए संगठन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी कहा कि मातृत्व एक क्षणिक घटना नहीं, बल्कि एक निरंतर चलने वाली जीवन यात्रा है, जिसमें हर चरण की अपनी विशेष ज़रूरतें और चुनौतियां होती हैं।

इसी सोच के तहत डिज़ाइन किया गया ‘मॉम’एंटम 2.0’ एक संरचित और दीर्घकालिक कार्यक्रम है, जो महिलाओं को उनके सबसे संवेदनशील और निर्णायक वर्षों में कार्यस्थल पर आवश्यक समर्थन देने का काम करेगा।

इस नीति के अंतर्गत संभावित सुविधाएं:
मातृत्व अवकाश से परे दीर्घकालिक देखभाल
लचीला कार्य समय और वर्क-फ्रॉम-होम विकल्प
मेंटरशिप, करियर री-ऑनबोर्डिंग और मानसिक स्वास्थ्य समर्थन
वर्क-लाइफ बैलेंस के लिए विशेष कार्यशालाएं

स्विगी की यह नई पहल कंपनी की उस निरंतर प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जो वह एक समावेशी और संवेदनशील कार्यस्थल बनाने के लिए कर रही है। यह नीति न केवल मातृत्व के अनुभव को सहज बनाएगी, बल्कि महिलाओं को अपने व्यक्तिगत जीवन और पेशेवर करियर में संतुलन बनाकर आगे बढ़ने की पूरी आज़ादी भी देगी।

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