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मुस्लिम वर्ल्ड : फिलिस्तीन और गाजा के लिए साजिश …क्या बड़े देशों के आंसू घड़ियाली हैं?

सूफी खान

फिलिस्तीन और गाजा के खेमे में रहकर इजरायल के लिए काम। जी हां, यही तो साजिश चल रही है। दरअसल, अरब और यूरोपियन मुल्कों में अब पब्लिक की तरफ से वहां के हुक्मरानों पर भारी दबाव बन रहा है। पिछले रविवार को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी हार्बर पर लाखों लोग गाजा के लिए उमड़ पड़े थे। लोगों का कहना था कि फिलिस्तीन को आजाद करो। सिडनी में इकट्ठा लोगों की तादाद इतनी ज्यादा थी कि पूरी दुनिया में गाजा के दर्द को लेकर एक पैगाम गया। कुछ अरब देशों में जहां इस तरह के प्रदर्शन नहीं हो सकते, वहां सोशल मीडिया के जरिए लोग गाजा और फिलिस्तीन के लिए अपनी बात और अपने जज्बात का इजहार कर रहे हैं। यही मजबूरी है कि बड़े मुल्कों को अब फिलिस्तीन के लिए कुछ करते दिखना पड़ रहा है। लेकिन उसमें भी वो इजरायल का साथ ही दे रहे हैं पर्दे के पीछे से।
बेल्जियम और स्पेन जैसे छोटे यूरोपीय मुल्क तो फिलिस्तीन को आजाद कराने के लिए दिल से साथ हैं। लेकिन उनकी वो ताकत नहीं, जो ब्रिटेन, फ्रांस, सऊदी, तुर्की जैसे देशों की है। ये देश फिलिस्तीन के साथ दिखकर भी उसके दुश्मन की मदद कर रहे हैं। दरअसल, पिछले दिनों एक बड़ी काॅन्फ्रेंस यूनाइटेड नेशन्स ने की थी, जिसमें फ्रांस और सऊदी अरब ने खुलकर कहा कि इजरायल गाजा में जंग बंद करे और हम फिलिस्तीन को एक अलग मुल्क के रूप में मान्यता देने का प्रस्ताव रखने जा रहे हैं। ब्रिटेन ने भी कहा कि वो फिलिस्तीन को मान्यता दे देगा अगर इजरायल गाजा में सीजफायर नहीं करता। कनाडा ने भी यही बात रखी। संयुक्त रूप से प्रस्ताव पारित हुआ।
लेकिन आपको जानकर ताज्जुब होगा कि फिलिस्तीन के खिलाफ यह एक बहुत बड़ी साजिश साबित हुई। एक्सपर्ट कहते हैं कि ये बस कहने के लिए टू स्टेट सॉल्यूशन है। ये देश मांग भले ही आजाद फिलिस्तीन की कर रहे हैं, लेकिन मसौदा ऐसा है कि फिलिस्तीन बनकर भी न बने। दरअसल, सऊदी अरब अंदर ही अंदर ख्वाहिशमंद है कि किसी तरह उसके इजरायल के साथ रिश्ते बन जाएं। अभी एक माह पहले ही इजरायल की राजधानी तेल अवीव में बड़े-बड़े पोस्टर लगे थे, जिसमें ईरान को छोड़कर सभी मिडिल ईस्ट के वो मुल्क इजरायल के पीएम के साथ दिखाए गए, जो या तो अब्राहम समझौते के तहत इजरायल से जुड़ चुके हैं या जुड़ने जा रहे हैं। इसमें सऊदी सबसे आगे है।
लेकिन पिछले करीब दो साल से इजरायल ने गाजा में जिस तरह की कत्लोगारत को अंजाम दिया है उससे सऊदी कयादत को लगता है कि अगर वो इजरायल के साथ जुड़ जाते हैं तो इससे उनकी अवाम जो फिलिस्तीन के लिए दिल दुखाती है कहीं बागी न हो जाए। जानकार कहते हैं कि ऐसे में सऊदी ने भी ऐसा ही प्लान बनाया है कि एक आजाद फिलिस्तीन बनेगा। कब बनेगा कोई नहीं जानता, लेकिन इजरायल से उसकी हामी ले ली जाए। उस हामी के आधार पर सऊदी इजरायल के साथ रिश्ते बना लेगा और कहने को भी हो जाएगा कि सऊदी के प्रस्ताव पर इजरायल ने आजाद फिलिस्तीन की बात मान ली। यही काम  फ्रांस भी कर रहा है बिना हाथ-पैर और आंखों वाला ऐसा फिलिस्तीन बनाने का प्रस्ताव, जिसके पास कोई अधिकार कोई राइट्स न हो न फौज रखने का, ना हथियार रखने का ना अपनी रक्षा का। ये सारे फैसले कोई और करेगा। ये एक ऐसी साजिश है, जो इजरायल को सीधे फायदा पहुंचाती है। जिस फिलिस्तीन को इजरायल ताकत के दम पर खत्म नहीं कर पा रहा है, उसे अरब मुल्क और बड़े यूरोपीय देश इस तरह का मसौदा बनाकर खत्म जरूर करवा देंगे।

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