-‘ईडी’ सरकार का टारगेट, ५० लाख बहनों की करनी है छुट्टी
सामना संवाददाता / मुंबई
चुनाव से पहले ‘लाडली बहन’ कहकर महायुति सरकार ने करोड़ों महिलाओं को सपनों का झुनझुना थमा दिया। अब जब वोटों की फसल कट चुकी है, तो एक-एक कर उन बहनों को योजना से बाहर फेंककर एक तरह से चोट पहुंचाने का काम किया जा रहा है। जिन अपात्र लाभार्थियों को पहले जानबूझकर शामिल किया गया, अब उन्हीं पर कार्रवाई के नाम पर शुद्धिकरण का ढोंग रचा जा रहा है। सरकार की नियत को देखते हुए माना जा रहा है कि ५० लाख से ज्यादा महिलाओं की योजना से छुट्टी हो जाएगी। विडंबना यह है कि बिना मदद और उम्मीद के असली जरूरतमंद महिलाएं आज भी लाइन में खड़ी हैं।
राज्यभर में २.५९ करोड़ महिलाओं से आवेदन मंगवाकर सरकार ने पहले तो वोट बैंक मजबूत किया। उसके बाद फिर बजट में केवल ३६ हजार करोड़ का सीमित प्रावधान कर योजना को खुद ही बोझ साबित किया। चुनावी फायदे के लिए बिना ठोस छानबीन के लाभार्थियों को जोड़ने वाली सरकार अब आंगनवाड़ी सेविकाओं से घर-घर जाकर पड़ताल करवा रही है। २१ साल से कम, ६५ से ज्यादा उम्र की महिलाएं, एक ही परिवार की एक से अधिक सदस्याएं, सरकारी कर्मचारी आदि सब अब अपात्र घोषित किए जा रहे हैं। मगर सवाल उठता है कि क्या यह गलती सरकार की नहीं थी? और क्या इसकी सजा अब उन गरीब महिलाओं को मिलेगी जो सचमुच इस सहायता की हकदार थीं, जिन्हें मामूली खामियों की वजह से योजना से बाहर कर दिया जाएगा?
धनी महिलाओं की शुरू हुई पहचान
महायुति सरकार ने योजना में शामिल धनी महिलाओं की भी पहचान शुरू कर दी है, जिनके परिवार की सालाना आय ढाई लाख रुपए से अधिक है। इसके लिए आयकर विभाग से सीधा पत्राचार कर डाटा मांगा गया है। इस आधार पर अनुमान है कि ५० लाख से अधिक महिलाएं और अपात्र साबित होंगी। यह पूरी कार्रवाई तब हो रही है, जब सियासी मकसद पूरा हो चुका है। पहले योजनाओं के नाम पर वोट बटोरे गए, अब उसी योजना में घोटालों की बू आने लगी है। असली लाभार्थिनियां आज भी अपने दस्तावेज लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं, मगर जवाब में मिलता है कि आपकी जांच जारी है।
