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दादर के कबूतरखाने को हटाना क्रूरता …पूर्व महापौर किशोरी पेडणेकर ने बोला हमला

सामना संवाददाता / मुंबई
दादर के कबूतर खाना प्रकरण पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की उपनेता व पूर्व महापौर किशोरी पेडणेकर ने महायुति सरकार को घेरा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले वैकल्पिक व्यवस्था न करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि ९३ साल पुराने इस कबूतर खाने को झोपड़पट्टियों की तरह संरक्षित किया जा सकता था।
पेडणेकर ने मनपा की कार्रवाई को क्रूर करार देते हुए कहा कि इससे जैन समाज की भावनाएं आहत हुई हैं और कबूतरों का दाना-पानी बंद करना अमानवीय है। सरकार को सुप्रीम कोर्ट से कहना चाहिए था कि वह कबूतरों को स्थानांतरित करने की वैकल्पिक व्यवस्था करेगी।
कोई बीमारी नहीं होती
उन्होंने कहा कि जैन समाज के लोगों ने बताया कि नायर और केईएम अस्पताल की रिपोर्ट आई है, जिसमें यह कहा गया है कि कबूतरखाने की वजह से सांस या अन्य बीमारियों का कोई सीधा संबंध नहीं मिला है। रिपोर्ट में यह साफ किया गया है कि कबूतरों के कारण इलाके में किसी प्रकार की बीमारी नहीं फैली है।
जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास
कांग्रेस का जोरदार हमला
दादर स्थित कबूतरखाने को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। कबूतरों के इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि सरकार जानबूझकर ऐसे मामले को विवादों में लाकर हवा दे रही है। भाजपा गठबंधन सरकार एक भयानक बीमारी बन चुकी है। इसका इलाज ज्यादा जरूरी हो गया है। राज्य में किसान संकट में हैं, युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा, महंगाई चरम पर है, कानून-व्यवस्था की हालत गंभीर है। इन तमाम मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ही सरकार ऐसे फालतू विवाद खड़े कर रही है।
जल्दबाजी में लिया फैसला
दादर में ऐतिहासिक कबूतर खाने को हटाने के लिए सामाजिक संगठन एकजुट हो गए हैं। ऐसे में मनपा और सरकार से दो-दो हाथ कर रहे सामाजिक संगठनों को समर्थन देने हेतु राकांपा (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार भी कल दादर पहुंचे और कबूतर खाने के सामने स्थित जैन मंदिर में आंदोलनकारियों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि मनपा ने कबूतर खाने को लेकर जल्दबाजी में पैâसला लिया।

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