मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनादिशाहीन युवा पीढ़ी!

दिशाहीन युवा पीढ़ी!

दिशाहीन हो गई युवा पीढ़ी
परिश्रम का कर दिया त्याग
सबकुछ मिल जाए बिन हाथ हिलाये
ऐसी बन गई सोच विचार
शीघ्रता से परिपूर्ण हो जाएं सपने
प्रतीक्षा का कर दिया परित्याग
समय था जब पढ़ने गुनने का
बिना मकसद आवारगी में बिताया ज़रूरतों का पड़ा दबाव कंधों पर
बुद्धि शरीर पड़ गये शिथिल
नेक काम की तरफ उठे न कदम
कुमार्ग पर चलने का मन बनाया
कलम ,कुदाल किसानी की जगह
चाकू,कट्टे तमनचाओं को उठाया
घर की सात्विक भोजन की थाली छोड़
सिगरेट शराब नशे को अपनाया
पहले घर से पैसों की चोरी की
फिर सड़को पर सीनाजोरी की
नाम कमाने हेतु, बदनामी का डर न सताया
पुरखों को मिले सम्मान को तुमने मिट्टी में मिलाया
घर की नींव, दहलीज सिहर उठी
किस पापी ने यहां जन्म लिया
सज्जन लोगों से आंखें चुराते
बाहुबलियों से हाथ मिलाया
नापाक इरादों में उलझे रहते
व्यसनों से बर्बाद हो रहे
गेंगस्टरो से मिल कर मांगते फिरौती
निरपराध लोगों के खून से खेलते होली
छुपते छुपाते जीवन बिताते
चूहे बिल्ली का खेल खेलते
कभी मां बाबा का मोह न आया
मांगी थी तुझे पाने के लिये मन्नतें
तुम मांगते हो लोगों से फिरौती
गोली मारते और खाते हुए गोली
बन जाते हो हैवान कभी
सड़कों पर लावारिस मरते
क्या मिलती पहचान तुम्हें
कभी सोचा है तुमने क्या इसलिए
सुन्दरतम मानव जीवन था पाया
कर्म सुधार ले अब समय है
तू भी जीवन जी ले
औरों को भी अपना जीवन जीने दे
बेला विरदी

अन्य समाचार