-मच्छिमार कृति समिति ने लगाया ‘महायुति सरकार’ पर आरोप
सुरेश गोलानी / मुंबई
मछली पालन को लेकर केंद्र सरकार ने बजट में कई बड़ी घोषणाएं और वादे तो कर दिए पर असल उद्देश्य केवल बड़ी निजी कंपनियों और पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाकर पारंपरिक मछुआरों की नैया डुबोने का है। ऐसा आरोप ‘अखिल महाराष्ट्र मच्छिमार कृति समिति’ ने राज्य की महायुति सरकार पर लगाया है।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मत्स्य विभाग ने १ अगस्त, २०२५ को भारतीय ध्वजधारी मछली पकड़ने वाले जहाजों द्वारा उच्च समुद्र में दीर्घकालिक (सस्टेनेबल) मत्स्य पालन दिशा-निर्देश का मसौदा जारी किया, जिस पर ३० अगस्त तक सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की गर्इं। गौरतलब है कि यह मसौदा भारतीय क्षेत्रीय जल के बाहर मछली पकड़ने के लिए ‘प्राधिकरण पत्र’ (लेटर ऑफ अथॉरिटी) जारी करने का प्रावधान करता है, जिसके लिए एक बड़ी रकम बैंक गारंटी के रूप में देना अनिवार्य है। इस पैâसले का कड़ा विरोध करते हुए ‘अखिल महाराष्ट्र मच्छिमार कृति समिति’ के अध्यक्ष देवेंद्र दामोदर टंडेल ने आरोप लगाया कि प्रत्येक नाव के लिए २५ लाख रुपए की बैंक गारंटी अनिवार्य करने से केवल बड़ी निजी कंपनियों को ही इस क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति मिलेगी और पारंपरिक मछुआरे पीछे छूट जाएंगे।
मछुआरों के खिलाफ हैं ये नियम
समिति के कार्यकारी अध्यक्ष बर्नार्ड डिमेलो ने कहा, ‘ये नियम पारंपरिक मछुआरों के खिलाफ हैं और अगर इनमें संशोधन नहीं किया गया तो कड़ा विरोध होगा। सरकार को हमारे सुझावों को गंभीरता से लेना ही होगा, ताकि हम जैसे छोटे मछुआरे इन पूंजीपतियों के जाल में न फंसें’ भारतीय ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले जहाज वे होते हैं, जो भारत में पंजीकृत होते हैं और मर्चेंट शिपिंग अधिनियम, १९५८ के अनुसार भारतीय ध्वज फहराने के हकदार होते हैं।
मांगें नहीं मानीं तो होगा तीव्र विरोध
समिति की मांग है कि गहरे समुद्र में मछली पकड़ने का अधिकार केवल मछुआरा सहकारी समितियों और पारंपरिक मछुआरों को दिया जाए, बैंक गारंटी की सख्ती को रद्द किया जाए, मछुआरा समुदाय के लिए लेटर ऑफ अथॉरिटी में २५ प्रतिशत आरक्षण साथ ही आवेदन शुल्क पर ७५ प्रतिशत सब्सिडी दी जाए, राज्य स्तरीय सहकारी समितियों को गहरे समुद्र में सुरक्षा, शीत शृंखला (कोल्ड चेन), र्इंधन आपूर्ति और मदर वेसल के संचालन की अनुमति, अवैध मछली पकड़ने पर नियंत्रण कर कठोर कार्रवाई, गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए अलग बंदरगाह और नेविगेशन चैनल का निर्माण, ‘मच्छिमारी’ बंदी की अवधि का राज्यव्यापी सम्मान और अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण हेतु २०१२ के संयुक्त राष्ट्र केपटाउन समझौते को मान्यता दें। इतना ही नहीं, समिति ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं की गर्इं तो तीव्र विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
