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कोर्ट के आदेश के बावजूद वसई-विरार मनपा नहीं खाली करवा पाई जर्जर इमारत

 -क्या मनपा कर रही है हादसे का इंतजार

सामना संवाददाता / वसई

वसई-विरार में ‘पुष्पांजलि’ सोसाइटी की चार जर्जर इमारतों को खाली करने के लिए कोर्ट ने २६ अगस्त तक का समय दिया था, लेकिन कुछ टेनेंट्स ने इमारत को अब तक खाली नहीं किया है। इससे मनपा प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या वसई-विरार महानगरपालिका किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है? यह मामला तब शुरू हुआ जब वसई-विरार महानगरपालिका ने २८ फरवरी को दीवान एंड संस हाउसिंग एन्क्लेव रोड स्थित ‘पुष्पांजलि’ और ‘दीपांजलि’ की चार इमारतों को जर्जर घोषित किया था। इन इमारतों की सुरक्षा को लेकर अलग-अलग रिपोर्टें सामने आर्इं, जिसके बाद महानगरपालिका ने मामले को तकनीकी सलाहकार समिति के पास भेजा। समिति ने २७ जून को अपनी रिपोर्ट में इन इमारतों को जर्जर बताया।
इसके बाद १ जुलाई को महानगरपालिका ने इमारतों को खाली करने का नोटिस जारी किया। सोसाइटी के ११३ सदस्यों में से ९० प्रतिशत ने पुनर्विकास का पैâसला किया और एक डेवलपर भी नियुक्त कर लिया। ११ सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई और इमारतों को खाली करने से इनकार कर दिया। इसके बाद, सोसाइटी ने मुंबई हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां कोर्ट ने सोसाइटी को खाली करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने दिया था खाली करने का आदेश
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उन सदस्यों को फटकार लगाई जो इमारतों को खाली करने से मना कर रहे थे और पुनर्विकास में बाधा डाल रहे थे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर अल्पसंख्यक सदस्य सहयोग नहीं करते हैं, तो पुलिस की मदद से इमारतों को ध्वस्त किया जाएगा। याचिकाकर्ताओं के वकील अभिजीत कुलकर्णी ने कोर्ट में तर्क दिया कि कुछ सदस्यों को बाकी लोगों की जान खतरे में डालने और पुनर्विकास में देरी करने का कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने २६ अगस्त तक का समय देते हुए महानगरपालिका को इमारतों को खाली कराने का आदेश दिया था, लेकिन कुछ सदस्य अभी भी इमारत में रह रहे हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या मनपा प्रशासन कोर्ट के आदेश का पालन करेगा और इन इमारतों को खाली कराएगा या फिर वसई-विरार मनपा फिर किसी दुर्घटना का इंतजार कर रही है।

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