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‘गंगा माई की बेटियां’: बनारस की परंपरा में रची कहानी, कलाकारों का सच्चा समर्पण

हिमांशु राज

जी टीवी का नया ड्रामा ‘गंगा माई की बेटियां’ बनारस की ऐतिहासिक गलियों और गंगा के किनारों से जुड़ी एक भावनात्मक यात्रा है, जिसमें एक मां की ममता, उसका साहस और बेटियों के रिश्ते की गहराई को बखूबी पेश किया गया है। कहानी वाराणसी की संस्कृति में रची-बसी है, जहां गंगा माई अपने पति द्वारा सिर्फ बेटा न होने के कारण छोड़े जाने के दर्द को झेलते हुए, अपनी बेटियों को प्यार और आत्मसम्मान के साथ पालने का फैसला करती हैं। इस किरदार को शुभांगी लाटकर ने बड़े ही सशक्त अंदाज में निभाया है।

सीरियल में गंगा माई की तीन बेटियों—साहना, स्नेहा और सोनी की भूमिका क्रमशः सृष्टि जैन, अमनदीप सिद्धू और वैष्णवी प्रजापति निभा रही हैं. इस शो को खास बनाने के लिए कलाकारों ने खुद को वाराणसी की संस्कृति में ढालने के लिए भरपूर मेहनत की। खासतौर पर सृष्टि जैन ने अपने किरदार साहना में असलीपन लाने के लिए बनारसी बोली, उच्चारण और बोलचाल की बारीकियों को बारीकी से सीखा. उन्होंने एक भाषा कोच की मदद ली, निर्देशक के वाराणसी से जुड़े अनुभव का लाभ उठाया और स्थानीय वीडियो देखकर लहजे को समझा। सृष्टि साझा करती हैं, “साहना मेरे लिए महज एक किरदार नहीं था, वो इस शहर की बेटी थी. उसकी हर बात में बनारस की आत्मा और ऊर्जा नजर आए, यही मेरा लक्ष्य रहा. वाराणसी की संस्कृति ने मुझे और मेरे किरदार को एक अलग ही पहचान दी।”

शो की शूटिंग वाराणसी के घाटों और गलियों में होने से इसमें असलीपन की झलक मिलती है. कलाकारों का यह समर्पण और मेहनत ‘गंगा माई की बेटियां’ को एक भावपूर्ण और दिल छू लेने वाली कहानी बना देता है. ज़ी टीवी पर जल्द ही प्रसारित होने जा रहा यह शो निश्चित रूप से दर्शकों को मां-बेटी के रिश्ते की गहराई तथा बनारस की संस्कृति से रूबरू कराएगा।

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