-शहरी, ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में नए कड़े मानदंड लागू
– छात्रों की सुविधा की अनदेखी, शिक्षा जगत में रोष
सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य शिक्षा मंडल ने छात्रों पर ही गाज गिरा दी है। मंडल ने पैâसला लिया है कि न्यूनतम विद्यार्थी संख्या पूरा न करनेवाले केंद्र सीधे बंद किए जाएंगे, जिससे खासकर ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के विद्यार्थियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। दूसरी तरफ नए कड़े मानदंड लागू करने से हजारों छात्रों की मुसीबतें बढ़ने वाली हैं। शिक्षा की पारदर्शिता के बहाने छात्रों की सुविधा की अनदेखी ने शिक्षा जगत में भारी रोष पैदा कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में अब से परीक्षा केंद्र के लिए निर्धारित न्यूनतम छात्र संख्या के मानदंड कठोरता से लागू होंगे। शहरी क्षेत्र में १०वीं के लिए कम से कम २०० और १२वीं के लिए २५० विद्यार्थी, ग्रामीण क्षेत्र में क्रमश: १२५ और १५० विद्यार्थी, जबकि अति दुर्गम क्षेत्रों में १०० से १२५ विद्यार्थियों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। इस मानदंड में न आनेवाले केंद्र सीधे बंद कर दिए जाएंगे। इसे फरवरी-मार्च २०२५ से लागू किए जाने की उम्मीद जताई गई है। इससे राज्य के कई छोटे परीक्षा केंद्रों के बंद होने की संभावना बन गई है। राज्य शिक्षा मंडल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी क्षेत्र में छात्रों की सुविधा के लिए केंद्र बनाए रखना अत्यावश्यक होगा तो संबंधित प्रस्ताव विभागीय मंडल की सक्षम समिति के सामने पेश करना होगा। मगर इसे भी कड़ी जांच के बाद ही मंजूरी मिलेगी। इस पैâसले से हजारों विद्यार्थियों की केंद्र व्यवस्था में बड़ा बदलाव होगा। मंडल का कहना है कि निष्पक्ष व ईमानदार परीक्षा के लिए यह कदम आवश्यक है।
विद्यार्थियों की बढ़ सकती हैं परेशानियां
शिक्षा संस्था महासंघ का कहना है कि परीक्षा केंद्र बंद करने की यह कार्रवाई अनुशासन और पारदर्शिता के लिहाज से उचित है। लेकिन इससे विद्यार्थियों की परेशानियां बढ़ सकती हैं। राज्य शिक्षा मंडल ने परीक्षा केंद्रों के मानदंडों में बड़ा फेरबदल करते हुए न्यूनतम छात्र संख्या का बंधन लगाया है। ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के स्कूलों को इससे बड़ा झटका लग सकता है।
महासंघ की मांग, बिना ठोस कारण पुराने केंद्र न करें बंद
राज्य मंडल को यह निर्णय तुरंत वापस लेना चाहिए। नए परीक्षा केंद्रों के प्रस्ताव स्वीकार कर मंडल की नियमावली के अनुसार जो स्कूल और कॉलेज मानदंडों में फिट बैठते हैं, वहां परीक्षा केंद्र दिए जाने चाहिए। ठोस कारण के बिना पुराने परीक्षा केंद्रों को बंद न करें।
