-३ वर्षों से मरीजों के जीवन से हो रहा था खिलवाड़
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
मुंबई मनपा के अस्पतालों में एक बड़े आईसीयू स्वैâम का खुलासा हुआ है। इसके बाद चार बड़े अस्पतालों में कार्यरत प्राइवेट एजेंसियों को बर्खास्त कर दिया गया है। वीएन देसाई अस्पताल में फर्जी डॉक्टर के पैâले जाल ने मरीजों की जान को खतरे में डाल दिया था। इस खुलासे ने मनपा के स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार की पूरी पोल खोल दी। फिलहाल, अब मनपा ने आउटसोर्सिंग के इस खेल पर शिकंजा कसते हुए अपने डॉक्टरों के माध्यम से आईसीयू सेवाएं संचालित करने का आदेश दिया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासन फर्जी डॉक्टर और भ्रष्ट एजेंसी को कभी सजा देगा या फिर जनता की जान के साथ खिलवाड़ जारी रहेगा।
पुलिस को शिकायती
पत्र देकर झाड़ा पल्ला!
-दर्ज करानी चाहिए थी एफआईआर
मनपा के अस्पतालों में धड़ल्ले से फर्जीवाड़ा हो रहा है। जब एक मामला पकड़ में आया तो मनपा ने एफआईआर के बजाय पुलिस में एक शिकायती पत्र देकर अपना पल्ला झाड़ लिया।
कुछ दिन पहले सांताक्रुज के वीएन देसाई अस्पताल में मौजूद १० बेड के एमआईसीयू वार्ड में मरीजों का इलाज एक नकली डॉक्टर द्वारा किए जाने का मामला सामने आया था। यह मामला उजागर होने के बाद यह भी पता चला कि आईसीयू की जिम्मेदारी जिस एजेंसी को दी गई थी, उसका कार्यकाल भी मार्च महीने में खत्म हो चुका है। इसके बावजूद वह अपनी सेवाएं दे रही थी, जो अब तक जारी थीं। हालांकि, इस मामले का पर्दाफाश होने के बाद अस्पताल प्रशासन और मनपा की जमकर किरकिरी हुई थी। यह मामला अभी तक पूरी तरह से शांत नहीं हुआ था कि अब पता चला है कि देसाई अस्पताल के साथ ही कांदिवली शताब्दी अस्पताल में मौजूद ३० बेड के एमआईसीयू व एसआईसीयू, बांद्रा स्थित भाभा अस्पताल में १२ बेड के एमआईसीयू और विक्रोली के क्रांतिवीर महात्मा ज्योतिबा फुले अस्पताल में मौजूद १० बेड के एमआईसीयू वार्ड को चलाने की जिम्मेदारी भी प्राइवेट एजेंसी को दी गई थी। इसका पता चलते ही मनपा ने एजेंसी के ठेके को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है।
कैसे बढ़ाई गई अवधि?
मनपा अस्पताल के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि किसी एजेंसी के ठेके की अवधि बढ़ानी होती है, तो उसके कामकाज की स्थितियों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग केवल एक बार बढ़ा सकता है। लेकिन इस मामले में एजेंसी द्वारा दी गई सर्विस में लापरवाही बरती गई। फेक डॉक्टर से सेवा दिलाई गई। कई मामलों में स्टाफ नर्सों की ओर से भी शिकायत की गई। इसके बावजूद नियमों को पूरी तरह से ताक पर रखा गया और गैर कानूनी तरीके से ठेके की अवधि दोबारा अगस्त आखिरी तक बढ़ाया गई। सबसे चौंकानेवाली बात यह है कि एजेंसी के इस फर्जीवाड़े के खिलाफ थाने में मामला दर्ज कराया जाना चाहिए था, लेकिन थाने में एक शिकायती पत्र देकर पल्ला झाड़ लिया गया। इतना ही नहीं, एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की भी जहमत नहीं उठाई गई।
अस्पताल के डॉक्टर देखेंगे आईसीयू
मनपा के स्वास्थ्य विभाग की ओर से आदेश निर्गत किया गया है कि आईसीयू को अपने ही अस्पतालों के डॉक्टरों द्वारा चलाए जाए। इसके लिए डीएनबी शिक्षक, डीएनबी छात्र, बांडेड सीनियर रेजिडेंट, रजिस्ट्रार, हाउस ऑफिसर, पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल अफसरों की मदद ली जाएगी।
