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अजीत दादा ही थे सिंचाई घोटाले के असली मास्टरमाइंड!.. तत्कालीन अभियंता का गंभीर आरोप

सामना संवाददाता / मुंबई

राज्य के सिंचन घोटाले के असली मास्टरमाइंड अजीत पवार ही थे। उस समय अगर उच्चस्तरीय जांच बैठाई जाती और उन पर कार्रवाई की जाती तो वे जेल में होते। लेकिन देवेंद्र फडणवीस ने उनके पापों को छिपाया और प्रधानमंत्री मोदी ने भी उन्हें समर्थन दिया। इस तरह का गंभीर आरोप जलसंपदा विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता विजय पांढरे ने लगाया है।
विजय पांढरे ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए अजीत पवार के खिलाफ जलसंपदा घोटाले के आरोपों को दोहराया है। सिंचन घोटाले के चलते अजीत पवार को इस्तीफा देना पड़ा था। विजय पांढरे ने कहा है कि उस समय कांग्रेस ने जब उनकी जांच करवाने की कोशिश की तो सरकार ही गिरा दी गई। माधवराव चितले समिति ने जल सिंचन घोटाले की रिपोर्ट में भ्रष्टाचार से संबंधित पर्याप्त बातें दर्ज की थीं। चितले ने एक साक्षात्कार में कहा था कि इस मामले में उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए, लेकिन सरकार ने चितले समिति की रिपोर्ट भी दबाकर रखी। चितले ने कहा था कि अगर मेरी रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई की जाए तो अजीत पवार जेल जाएंगे। लेकिन अजीत पवार का जल सिंचन घोटाला दबाने का काम फडणवीस ने ही किया, इसमें कोई संदेह नहीं। विजय पांढरे ने यह भी कहा है कि सिंचन घोटाले में अजीत पवार को बचाने वाले दूसरे व्यक्ति नरेंद्र मोदी हैं। विजय पांढरे ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस ने ही अजीत पवार को सिंचन घोटाले में क्लीन चिट देने का काम किया। एसीबी ने अजीत पवार को सिंचन घोटाले में क्लीन चिट दी है। इस तरह की लिखित जानकारी नागपुर खंडपीठ के समक्ष दी गई।

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