अंधेरा

टिप्पणियों के बीच से गुजरते हुए
हमने देखा जहां अंधेरा है
वहां शराफत का नहीं
किसी और का डेरा है।
यह अद्भुत बात है
आजकल मुसीबत ने
पूरे वातावरण को घेरा है।
विकलता के इसी मोड़ पर
अपनों ने मुंह फेरा है।
संयम के उस पार उद्दंड़ता ने
एक नया चित्र उकेरा है।
पढ़ना असंभव नहीं मुश्किल है
यह विचार सिर्फ मेरा है।
इसीलिए हमने कविता में
कुछ कहा है, कुछ टेरा है ।
आज भटका हुआ सवेरा है ।।
-अन्वेषी

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