हिमांशु राज
अभिनेत्री सुष्मिता बानिक मानती हैं कि आज की तेज़-रफ़्तार डिजिटल दुनिया में माइक्रो ड्रामा ही मनोरंजन का भविष्य है। 2021 में जननी (इशारा चैनल) से उन्होंने टीवी डेब्यू किया और 2022 में संगदिल शेरदिल में धीरज धूपर के साथ नज़र आईं। अब वह इस नए शॉर्ट-फॉर्म नैरेटिव को लेकर खुलकर अपनी राय रखती हैं।
सुष्मिता के अनुसार, “माइक्रो ड्रामा कहानी का फास्ट-फॉरवर्ड वर्ज़न है। यहां दर्शक को पकड़ने के लिए बस कुछ सेकेंड मिलते हैं। पहले ही शॉट से असरदार लगना ज़रूरी है, वरना ऑडियंस तुरंत आगे बढ़ जाती है। छोटे फॉर्मेट का असली फॉर्मूला है—कम शब्द, ज़्यादा विज़ुअल्स, एक ट्विस्ट और दमदार क्लाइमैक्स।”
अभिनय को लेकर वह मानती हैं कि एक्टर को इसमें ज़्यादा सतर्क रहना पड़ता है। “अगर शुरुआती फ्रेम में ही आप इमोशन नहीं दिखा पाए तो कामयाबी मुश्किल है। शुरुआत में असर डालना ही सबसे अहम चुनौती है।”
स्क्रिप्ट और फिल्मांकन पर बात करते हुए सुष्मिता कहती हैं, “इस फॉर्मेट में डिटेलिंग का समय नहीं होता, इसलिए स्क्रिप्ट सशक्त होनी चाहिए। एक मजबूत कॉन्फ्लिक्ट और असरदार क्लाइमैक्स काफी है। विज़ुअल्स ही असली कहानी कहते हैं, डायलॉग्स दूसरे नंबर पर आते हैं।”
नई प्रतिभाओं के लिए यह फॉर्मेट उन्हें एक बेहतर मंच लगता है। उनके मुताबिक, “कम बजट में भी यहां अपनी क्रिएटिविटी दिखा सकते हैं। कई चेहरे इसी से पहचान बना चुके हैं।”
डिजिटल ऑडियंस की बदलती पसंद पर वह जोड़ती हैं, “आज लोग स्नैकेबल कंटेंट चाहते हैं। माइक्रो ड्रामा उनके लिए परफेक्ट है। वायरल होने से तुरंत फीडबैक भी मिलता है, जो आर्टिस्ट के लिए सीखने का मौका बनता है।”
सुष्मिता का मानना है कि शॉर्ट कंटेंट का क्रेज़ भले ही तेज़ हो, लेकिन लंबी कहानियां हमेशा अपनी जगह बनाए रखेंगी।
