प्रेम ही परमात्मा है
प्रेम मेरे जीवन का अस्तित्व है।
कोई तुमसे घृणा करे
तुम उससे प्रेम करो
क्योंकि प्रेम शाश्वत है,
असीम, अनंत, अखंड और ताकतवर है।
घृणा न शाश्वत है और न ताकतवर है,
घृणा क्षुद्र है।
प्रेम स्वयं अविनाशी ईश्वर है,
प्रेम प्रकृति का जीवन-सार है।
प्रेम जीवन की कुंजी है,
प्रेम मनुष्य जीवन का उद्धार है।
प्रेम भवसागर से बेड़ा पार है।
प्रेम जीवन की सफलता
और जीवन धन्यता है।
जीवन मुक्ती है।
पर ध्यान रहे सच्चा प्रेम तुम्हारे हृदय में,
तुम्हारी हर स्वांस में रहता है।
सच्चे सद्गुरु प्रेम का साक्षात्कार
कराकर जीवन सफल कर देते हैं।
सद्गुरु की शाश्वत सत्य कृपा
और उनके शाश्वत सत्य ‘आत्मज्ञान’ के बिना
मनुष्य के अंदर हृदय स्थिति
‘जीवन-अस्तित्व परमात्मा’ का
द्वार खुलता ही नहीं है।
क्योंकि स्वयं प्रेम ही परमात्मा है।
-आर. डी. अग्रवाल ‘प्रेमी’
