-राज्य में केवल २ प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहन ही सड़कों पर
सुनील ओसवाल / मुंबई
प्रदूषण पर नियंत्रण और ईंधन की बढ़ती कीमतों के मद्देनज़र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी जैसी योजनाओं की घोषणा की। इसके बावजूद राज्य में नागरिकों का इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर उत्साह कम दिखाई दे रहा है। प्रादेशिक परिवहन विभाग के सूत्रों के मुताबिक, राज्य में अब तक पंजीकृत कुल वाहनों में से केवल १.९९ प्रतिशत वाहन ही इलेक्ट्रिक हैं।
केंद्र और राज्य सरकारों ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सब्सिडी, टैक्स में छूट और विभिन्न प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की हैं। सार्वजनिक परिवहन उपक्रमों को ई-बसों के लिए भी सब्सिडी दी गई है, फिर भी जनता का रुझान इस ओर नहीं बढ़ा है। कारण स्पष्ट हैं चार्जिंग स्टेशन की कमी, लंबी दूरी की यात्रा में असुविधा, उच्च रखरखाव लागत और कम रीसेल वैल्यू।
सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी और सुविधाएं जनता को फिलहाल आकर्षित करने में असफल हैं। जब तक चार्जिंग की बुनियादी सुविधाएं, लागत और पुनर्विक्रय मूल्य में सुधार नहीं होता, तब तक ई-वाहनों की बिक्री में उल्लेखनीय बढ़त की उम्मीद करना कठिन है।
ई-वाहनों से जुड़ी प्रमुख समस्याएं:
– राज्य में चार्जिंग स्टेशन अभी भी गाड़ियों की संख्या के अनुपात में बहुत कम हैं।
– लंबी दूरी की यात्रा के दौरान यह चिंता बनी रहती है कि गाड़ी चार्जिंग पॉइंट तक पहुंचेगी या नहीं।
– यदि चार्जिंग स्टेशन न मिले तो वाहन को टो करके घर लाना पड़ता है।
– इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतें पेट्रोल/डीजल गाड़ियों से अधिक हैं।
– रिपेयरिंग व मेंटेनेंस केवल अधिकृत शोरूम में ही संभव होने से खर्च बढ़ता है।
– रीसेल वैल्यू बेहद कम होने के कारण उपभोक्ता निवेश को लेकर असमर्थ महसूस करते हैं।
राज्य में कुल पंजीकृत वाहन (वर्षानुसार)
वर्ष पंजीकृत वाहन (संख्या)
२०२१-२२ १९,१२,४४७
२०२२-२३ २४,४७,२५७
२०२३-२४ २६,१४,७२०
२०२४-२५ २९,५२,४५६
२०२५-२६ १२,४३,५२५
कुल ४,०७,५१,६८७
राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या:
श्रेणी वाहन संख्या प्रतिशत
चारपहिया ६२,३९३ ०.१५
मोपेड ६,२३,५७८ ०.०६
ई-रिक्शा १९,३३५ ०.०५
दोपहिया ६,६३,७४० १.६३
कुल ८,०९,८८२ १.९९
