मुंबई। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने विभिन्न वस्तुओं पर जीएसटी दरों में कटौती की घोषणा कर आम ग्राहकों को राहत मिलने का आभास दिलाया। लेकिन केंद्र सरकार के परिपत्रक के अनुसार यह कटौती वास्तव में अप्रैल 2026 से ही लागू होने की संभावना है। इससे सरकार ने जनता को फिर गुमराह किया है, ऐसी कड़ी आलोचना राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार गुट के प्रदेश महासचिव और प्रवक्ता सुनील माने ने की।
माने ने बताया कि 18 सितंबर को जारी नए परिपत्रक के मुताबिक विक्रेताओं को पुरानी कीमत वाली वस्तुएं 31 मार्च 2026 तक बेचने की अनुमति दी गई है। यानी ग्राहकों को छह महीने से भी अधिक समय तक इस कटौती का लाभ नहीं मिलेगा। पहले जारी परिपत्रक में कटौती वाली वस्तुओं की नई कीमतें अखबारों में विज्ञापन देकर बताना अनिवार्य था; लेकिन नए परिपत्रक में यह शर्त भी हटा दी गई है। इससे आम नागरिकों को राहत मिलने के बजाय बड़े उद्योगपतियों के हित साधे गए हैं।
व्यापारी वर्ग ने भी इस निर्णय पर नाराजगी जताते हुए सवाल किया है कि “अगर कोई वस्तु छह महीने बिना बिक्री के रखी जाए तो उसे पुरानी कीमत पर ही कैसे बेचा जा सकता है?” इस पर सरकार को तत्काल स्पष्टीकरण देना चाहिए।
“केंद्र सरकार ने पहले ही जीएसटी के मामले में दोषपूर्ण वसूली की थी। कई सालों बाद जाकर सरकार को अपनी गलती का एहसास हुआ। लेकिन अब राहत देने की बजाय सरकार ने जनता के मुंह पर फिर पानी फेर दिया है,” ऐसी आलोचना माने ने की।
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