सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य की महायुति सरकार औद्योगिक क्षेत्र में निवेश करने वालों को तरह-तरह का प्रलोभन दे रही है। इसके लिए मूलभूत सुविधाओं से लेकर बिजली-पानी में भी रियायत का दावा कर रही है, जबकि औद्योगिक उपयोग में आने वाले पानी की दर में करीब १७ प्रतिशत की वृद्धि की गई है। बिजली दरों में पहले ही वृद्धि की गई थी। न्यू इंडिया टेक्सटाइल पार्क की अध्यक्ष ने शुक्रवार को बताया कि बिजली दरों में बढ़ोतरी से प्रभावित उद्योगों के लिए पानी दर में यह वृद्धि एक और संकट लेकर आई है।
बता दें कि महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम ने १६ रुपए प्रति घन मीटर यानी एक हजार लीटर पानी की दर में १७ प्रतिशत की भारी वृद्धि की है। यह दर अब १८.७५ रुपए प्रति घन मीटर हो गई है। निगम ने हाल ही में सभी उद्यमियों को इस दर वृद्धि के संबंध में पत्र भेजे हैं और उन्हें सूचित किया है कि उक्त दर वृद्धि १ सितंबर २०२५ से लागू होगी। इस पत्र में कहा गया है कि राज्य जल संसाधन प्राधिकरण द्वारा बढ़ाए गए पानी के शुल्क और विद्युत नियामक आयोग द्वारा अनुमोदित बढ़ी हुई बिजली दरों के कारण उक्त दर वृद्धि करनी पड़ रही है। राज्य में औद्योगिक क्षेत्र अभी बिजली की कीमतों में हुई हालिया बढ़ोतरी से उबर भी नहीं पाया था कि एमआईडीसी ने पानी के दाम बढ़ाकर एक और झटका दे दिया है।
बिजली बिल में भी अधिभार बढ़ाया
बता दें कि सरकार ने बिजली की कीमतों में रियायत देने की घोषणा की थी, लेकिन, र्इंधन अधिभार बढ़ा दिया गया। इससे अप्रत्यक्ष रूप से बिजली की कीमतें बढ़ गई हैं। अब पानी के दाम बढ़ने से उद्योग जगत के मासिक खर्च में बढ़ोतरी होगी। अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाए जाने से जहां उद्योग पहले से ही मुश्किल में थे, वहीं पानी के शुल्क में बढ़ोतरी से भी उद्योग मुश्किल में पड़ गए हैं। औद्योगिक विकास महामंडल में नए उद्योग लगने के बजाय मौजूदा उद्योगों के बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। इससे रोजगार के अवसरों पर भी विपरीत असर पड़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
