सुनील ओसवाल / मुंबई
देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई अब गुजरात के लिए अवैध धंधों की ‘राजधानी’ बन गई है। गुटखा, ड्रग्स, क्रिकेट सट्टा, दीव-दमन की शराब, जुआ और अन्य अवैध धंधों का रोजाना करोड़ों का कारोबार हो रहा है। बताया जाता है कि यह काला धन अंगड़िया यानी हवाला के जरिए रोजाना मुंबई से गुजरात आता-जाता है।
मुंबई से लेकर नासिक, पुणे, नागपुर तक पूरे महाराष्ट्र में गुजरात के पैसे से चलने वाला अवैध कारोबार दिन-ब-दिन मजबूत होता जा रहा है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि धंधे किसके भरोसे फल-फूल रहे हैं? सूत्रों के मुताबिक, इन अवैध धंधों का नेटवर्क इतना संगठित है कि इसकी जड़ें मुंबई के कई इलाके में फैली हुई हैं। चर्नी रोड, झवेरी बाजार, कालबादेवी, फोर्ट, मझगांव से लेकर अंधेरी, गोरेगांव और बोरिवली में धड़ल्ले से अवैध कारोबार हो रहे है।
कैसे चलता है गोरखधंधा?
जानकारी के मुताबिक, गुजरात से गुटखा और मादक पदार्थ मुंबई में आते हैं, जो महाराष्ट्र में प्रतिबंधित हैं। इसके बाद इनका वितरण खास गोदामों से पूरे राज्य में किया जाता है। इसे किसको देना है ये पहले से तय किया रहता है, बाद में इसके पैसे हवाला नेटवर्क (अंंगड़िया) के जरिए भेजे जाते हैं। साथ ही बिना बिल का माल और उससे जुड़ा काला पैसा रोजाना भेजा और मंगाया जाता है। सूत्रों के मुताबिक, गुटखा, नशीले पदार्थों और सट्टेबाजी का पैसा अलग-अलग माध्यमों से गुजरात के अहमदाबाद, सूरत, वापी, बड़ौदा जैसे शहरों तक पहुंचता है।
राजनीतिक संरक्षण और सरकारी मशीनरी की ढिलाई
गुजरात से जुड़े इन गोरखधंधों को महाराष्ट्र में राजनीतिक संरक्षण हासिल होने की जानकारी सामने आई है। यही वजह है कि इन पर लगाम लगाना मुश्किल हो गया है। इस धंधे से जुड़े लोगों का कहना है कि कम खर्च में महाराष्ट्र की व्यवस्था को सेट किया जा सकता है। गुजरात से आने वाली अवैध पूंजी अब सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं, बल्कि पुणे, नागपुर, नासिक और अन्य शहरों तक फैल चुकी है।
सट्टेबाजों की फौज, क्लबों का कारोबार
शहर में फंटर नाम के एजेंट लाकर बिठाए गए हैं, जो सट्टेबाजी और जुए के अड्डों को संभालते हैं। क्रिकेट सट्टा अब एक पूरा उद्योग बन चुका है। जुआ घर और सट्टा क्लबों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।
