– नया कानून बनाने की तैयारी में महायुति
-फैसले का सामाजिक संगठनों ने किया विरोध
सामना संवाददाता / मुंबई
महायुति सरकार की नजर अब आदिवासियों की जमीन पर टिक गई है। सरकार ने आदिवासियों की जमीन पर डाका डालने के लिए सीधे नियम में ही बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए कानून में संशोधन किया जाएगा, ताकि आदिवासी लोगों की जमीन कॉर्पोरेट कंपनियों एवं बिल्डरों की झोली में डाली जा सके। सूत्रों के अनुसार, यदि ऐसा हुआ तो मुंबई के गोरेगांव स्थित आरे क्षेत्र सहित पालघर, वसई-विरार और ठाणे के आसपास आदिवासी इलाकों में बिल्डरों की सेंध बढ़ जाएगी। इन इलाकों से आदिवासियों का पलायन शुरू हो जाएगा।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के अनुसार, आदिवासी किसानों की जमीन गैर-आदिवासियों को लीज पर देने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए जल्द ही नया कानून बनाया जाएगा। इसके बाद आदिवासियों की जमीन बिल्डरों, उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट कंपनियों को देने का रास्ता खुल जाएगा। इससे शहरों से सटे आदिवासी इलाकों में विकास तेजी से हो सकेगा। लेकिन सरकार के इस पैâसले का राज्य के सामाजिक और किसान संगठनों ने विरोध किया है, जिससे राज्य का माहौल गरमा सकता है।
बता दें कि राज्य में आदिवासियों की जमीन और संपत्ति की लूट न हो, उनके अज्ञान का फायदा उठाकर जमीन उनसे छीनी न जाए, इसके लिए कानून बनाया गया था। यह कानून आदिवासियों को उनकी संपत्ति की रक्षा करने के लिए है, लेकिन अब सरकार इस कानून में बदलाव की तैयारी कर रही है।
आंदोलन के लिए विपक्ष तैयार
कांग्रेस नेता सुरेश राजहंस ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। राजहंस ने कहा कि सरकार की नजर अब आदिवासियों की जमीन पर है। पहले नियम में ढिलाई लाएगी फिर आदिवासियों पर बाहरी दबाव के जरिए उनसे उनकी जमीन सीधे बिल्डरों को दी जाएगी। कांग्रेस इसका विरोध करती है। हमने हमेशा आदिवासियों के हित के लिए लड़ाई लड़ी है। अब एक बार फिर हमें सड़क पर उतरकर आंदोलन की जरूरत पड़ी तो हम तैयार हैं।
ऐसा होगा नया नियम
नए कानून के अनुसार, जिलाधिकारी के सामने लीज एग्रीमेंट करना होगा। इसके लिए न्यूनतम मूल्य तय किया गया है। एक एकड़ के लिए ५० हजार रुपए और एक हेक्टेयर के लिए १.२५ लाख रुपए सरकार को राजस्व देना होगा। सरकार आदिवासी जमीन के संदर्भ में बड़ा पैâसला लेने की तैयारी कर रही है। इसके बाद गैर-आदिवासी लोग आदिवासियों की जमीन लीज पर ले सकेंगे। इसके लिए सरकार अलग कानून बनाने की तैयारी कर रही है।
