-लुभावनी योजनाओं का भार नहीं सहन कर पा रही है सरकार
-वित्त मंत्री ने माना राज्य पर है साढ़े नौ लाख करोड़ का कर्ज
सामना संवाददाता / मुंबई
महायुति सरकार ने सत्ता हासिल करने के लिए लाडली बहन योजना, वरिष्ठ नागरिकों की रियायतें आदि प्रलोभन देकर सत्ता हासिल तो कर ली है, लेकिन कर्ज का पहाड़ सरकार ने खड़ा कर लिया है। इस तरह का आरोप लगातार विपक्षी दल लगा रहे हैं। अब वित्त मंत्री अजीत पवार ने भी विपक्ष की इस बात को स्वीकार कर लिया है कि वर्तमान में राज्य पर ९.३२ लाख करोड़ का कर्ज है। इसके साथ ही पवार ने यह भी तर्क दिया कि यह कर्ज राज्य के कुल राजस्व से कम है।
बताया जाता है कि राज्य सरकार के सामने ९० दिनों में २४ हजार करोड़ का कर्ज जुटाने की स्थिति आ गई है। इस वित्तीय वर्ष के अंत तक यह कर्ज का आंकड़ा ९ लाख करोड़ से ऊपर हो जाएगा। मीडिया से बात करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य का कर्ज नियमों के दायरे में है। वर्तमान में राज्य पर ९.३२ लाख करोड़ का कर्ज है। यह कर्ज राज्य के कुल राजस्व से बहुत कम है। नियमों के अनुसार, राज्य का कर्ज कुल राजस्व के २५ प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। इस हिसाब से वित्तीय वर्ष २०२५-२६ में राज्य का कर्ज कुल राजस्व का केवल १८.८७ प्रतिशत है। यह अनुपात बेहद सुरक्षित है और यह दर्शाता है कि राज्य की स्थिति मजबूत है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की वित्तीय स्थिति का उचित समायोजन हो रहा है और राज्य अनावश्यक कर्ज से दूर है।
नौ महीनों में ९९ हजार करोड़ का कर्ज
केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को वित्तीय वर्ष २०२५-२६ में १ लाख ४६ हजार ६८७ करोड़ रुपए का कर्ज जुटाने की अनुमति दी है। इसमें से ९९ हजार करोड़ रुपए का कर्ज पहले नौ महीनों के लिए जुटाया जाएगा। राज्य सरकार ने नए वित्तीय वर्ष २०२५-२६ के अप्रैल माह में कुल ३४ हजार ५८९ करोड़ ३५ लाख रुपए का कर्ज लिया। मई में १९ हजार १७३ करोड़ रुपए और जून में २२ हजार ७२५ करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया।
बता दें कि राज्य पर कर्ज और ब्याज का बोझ दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इसलिए अब समय आ गया है कि सरकार खुले बाजार से सात से साढ़े सात प्रतिशत की ब्याज दर पर बॉन्ड के जरिए धन जुटाए।
