-ठाणे, कडोंमपा, उल्हासनगर और नई मंबई में होगा दोनों के बीच मुकाबला
सामना संवाददाता / मुंबई
ठाणे जिले में भारतीय जनता पार्टी और शिंदे गुट के बीच टकराव बढ़ने लगा है। इसकी झलक अभी से दिखने लगी है। ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और नई मुंबई मनपा में महायुति में शामिल दोनों दलों के बीच मुकाबला होने की प्रबल संभावना दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बार-बार कह रहे हैं कि मुंबई में महागठबंधन मिलकर चुनाव लड़ेगा, लेकिन फडणवीस ने अभी तक यह साफ तौर पर नहीं कहा है कि दूसरे शहरों में क्या होगा। इसमें दोनों उप मुख्यमंत्रियों के गढ़ भी शामिल हैं। भाजपा उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के ठाणे और अजीत पवार के पुणे में खुद को मजबूत करने की तैयारी में जुटी हुई है।
विधानसभा चुनाव के बाद पिछले सात महीनों में राज्य में कुल १४ लाख मतदाता बढ़े हैं। इनमें से २.२५ लाख मतदाता ठाणे से हैं। इसलिए बढ़ा हुआ मतदान मनपा चुनाव के नतीजे पलट सकते हैं।
ठाणे में भाजपा एकनाथ शिंदे गुट के लिए दुविधा पैदा करने के लिए मैदान में उतर गई है। विधायक संजय केलकर, निरंजन डावखरे और प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण शिंदे गुट के लिए दुविधा पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वन मंत्री गणेश नाईक ने शिंदे के खिलाफ सबसे आक्रामक रुख अपनाया है। नई मुंबई में अपने समर्थकों के बीच दादा के रूप में मशहूर नाईक ठाणे में शिंदे को सीधी चुनौती दे रहे हैं। उन्होंने ठाणे में जनता दरबार लगाकर और केवल कमल का नारा देकर अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। क्योंकि शिंदे को सीधे तौर पर निशाने पर लेने का काम नाईक कर रहे हैं।
प्रभुत्व बनाए रखना चाहते हैं नाईक
बताया जाता है कि एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही नई मुंबई में आक्रामक भूमिका अपना रहे है। मुख्यमंत्री का पद जाने के बाद भी नगरविकास विभाग शिंदे के पास होने के कारण नई मुंबई मनपा का प्रशासन वे ठाणे से चला रहे हैं। इसको लेकर शिंदे और नाईक के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है। इस टकराव के बीच अगर नई मुंबई में शिंदे गुट से भाजपा की महायुति होती है तो विद्रोह की संभावना अधिक जताई जा रही है क्योंकि नाईक नई मुंबई में अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए दृढ़ हैं।
