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जिया लाल आर्य, राजेश विक्रांत, डॉ राम बहादुर मिश्र व प्रो विजया भारती जेल्दी को जायसी सम्मान

अमेठी: अवधी साहित्य संस्थान अमेठी के छठवें स्थापना दिवस पर प्रमोद आलोक इंटर कॉलेज, मंगलपुर में दो दिवसीय अखिल भारतीय अधिवेशन के दूसरे दिन साहित्यकारों और कलमकारों का जमावड़ा हुआ। इस अवसर पर बिहार के पूर्व गृह सचिव आईएएस व साहित्यकार जिया लाल आर्य, मुंबई के इतिहास पर 7 पुस्तकों के लेखक राजेश विक्रांत, अवधी के मशहूर विद्वान डॉ राम बहादुर मिश्र व आंध्र विश्वविद्यालय की हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो विजया भारती जेल्दी समेत अन्य विद्वानों को मलिक मोहम्मद जायसी सम्मान तथा गोस्वामी तुलसीदास अवधी सम्मान से सम्मानित किया गया।

विमर्श, विमोचन एवं सम्मान कार्यक्रम में पहले सत्र में ‘हिन्दी साहित्य के संवर्धन में अवधी की भूमिका’ एवं दूसरे सत्र में ‘हिन्दी साहित्य का वैश्विक परिदृश्य ‘को लेकर विस्तार से गहन चर्चा की गई।

इस साहित्यिक संगम में देश के उत्तर एवं दक्षिण के विभिन्न प्रान्तों उत्तर प्रदेश सहित तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र,
मध्यप्रदेश, राजस्थान एवं दिल्ली से पधारे नामचीन साहित्यकारों ने भाग लिया।

आयोजन के प्रथम विमर्श सत्र में ‘हिन्दी साहित्य के संवर्धन में अवधी की भूमिका’ विषय पर गहन चर्चा प्रख्यात साहित्य मनीषियों द्वारा की गयी. अतिथियों का स्वागत करते हुए अध्यक्ष अवधी साहित्य संस्थान अमेठी डॉ. अर्जुन पाण्डेय ने कहा कि हिन्दी साहित्य सम्वर्द्धन में अवधी की भूमिका अहम है। गोस्वामी तुलसीदास का श्रीरामचरितमानस दुनिया का सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है। दुनिया के हर कोने में अवधी एवं अवधी संस्कृति देखने को मिलती है।

मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान लखनऊ की प्रधान संपादक डॉ. अमिता दुबे ने अपने उद्बोधन में कहा कि गौरव का विषय है कि अवध प्रांत के लोग दुनिया के कोने-कोने में जिस देश में बसे वहां अवधी एवं अवधी संस्कृति को प्रतिस्थापित करने का कार्य किया। विशिष्ट अतिथि राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ. रामबहादुर मिश्र ने अपने सम्बोधन में कहा कि नेपाल दुनिया का एकलौता देश है, जहां की राष्ट्रभाषा अवधी है। दुनिया के दर्जनों देश, जिनमें मारिसस,
वियतनाम, फिजी एवं सुरीनाम आदि देशों में अवधी का प्रभुत्व है। अवध एवं अवधी संस्कृति पर हमें गर्व होना चाहिए। प्रख्यात व्यंग्यकार व महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के छत्रपति शिवाजी महाराज राष्ट्रीय एकता पुरस्कार विजेता राजेश विक्रांत ने अपने सम्बोधन में कहा कि अवधी आज न की अठारह जनपदों की भाषा है वरन देश-विदेश में अपना प्रभुत्व स्थापित कर चुकी है। प्रमाण स्वरूप श्रीरामचरितमानस के नाते हिन्दुओं के जनमानस में समा चुकी है। अध्यक्षता करते हुए प्रख्यात साहित्यकार पूर्व गृह सचिव जिया लाल आर्य ने कहा कि बोली एवं भाषा के माध्यम से सम्पूर्ण साहित्य जगत को एक सूत्र में बांध कर राष्ट्र को गौरवशाली बना सकते हैं।

दूसरे विमर्श सत्र में ‘वैश्विक स्तर पर हिन्दी साहित्य का परिदृश्य’ विषय पर गहन विचार विमर्श किया गया। दूसरे सत्र की अध्यक्षता करते हुए चेन्नई से पधारी प्रोफेसर ए भवानी ने अपने उद्बोधन में कहा कि हिन्दी साहित्य के सम्वर्द्धन में प्रवासी भारतीय साहित्यकारों की भूमिका अहम है। तमिलनाडु से पधारे प्रोफेसर एम गोविंद राजन ने कहा कि हिन्दी साहित्य सम्वर्द्धन में आंचलिक भाषाओं का महत्वपूर्ण स्थान है, उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस एवं मलिक मोहम्मद जायसी कृत पद्मावत अवधी की दो आंखें हैं। अवधी सहित तेलुगू मलयालम कन्नड़ उड़िया बंगाली पंजाबी आदि सब मिलकर हिन्दी साहित्य को एक सूत्र में बांधती हैं। मुख्य अतिथि आंध्र विश्वविद्यालय की प्रोफेसर विजया भारती ने अपने उद्वोधन में कहा कि हमे अपनी मातृभाषा पर गर्व करना चाहिए। निज भाषा निज देश की उन्नति में साहित्य का योगदान सर्वोपरि है। विशिष्ट अतिथि पूर्व क्षेत्रीय निदेशक केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा प्रोफेसर हेमराज मीणा ने कहा कि बोली एवं भाषा साहित्य की रीढ़ हैं, बिना हिन्दी साहित्य को संवारा नही जा सकता है।प्रोफेसर मीणा जी ने कहा कि एक न एक दिन हिन्दी वैश्विक परिदृश्य में लोकप्रियता हासिल कर राष्ट्र को गौरवान्वित करेगी।

संगोष्ठी को पूर्व कुलसचिव डॉ पी एन प्रसाद, साहित्य भूषण प्रयास ज़ोशी, डॉ दयाराम मौर्य रत्न, डॉ बृजेश कुमार तिवारी , डॉ ओम् मिश्र, रत्नेश कुमार गौतम, हौसिला प्रसाद त्रिपाठी कुमार तरल एवं डॉ देवमणि तिवारी आदि ने संबोधित किया

तीसरे सत्र में डॉ. अर्जुन पाण्डेय द्वारा रचित सद्य: प्रकाशित ‘सोने मा सोहागा’ अवधी कहानी संग्रह के विमोचन के साथ जिया लाल आर्य की पुस्तक अंधेरै के उजाले तथा रामलखन तिवारी अकिंचन की पुस्तक साहित्य सृजन का विमोचन हुआ। साहित्यकारों को गोस्वामी तुलसीदास/मलिक मोहम्मद जायसी अवधी सम्मान से सम्मानित किया गया। स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में तमिलनाडु से डॉ. एम गोविंद राजन, डॉ. ए भवानी, आंध्रप्रदेश से प्रोफेसर विजया भारती जेल्दी,भोपाल से प्रयास जोशी, सुधा कांत मिश्र बेलाला, शिवाकांत त्रिपाठी सरस, राजस्थान से प्रो. हेमराज मीणा, दिल्ली से मनोज मिश्र, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ. रामबहादुर मिश्र, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान लखनऊ की प्रधान संपादक डॉ. अमिता दुबे, पूर्व गृह सचिव बिहार जिया लाल आर्य, पूर्व कुलसचिव पारसनाथ प्रसाद, राजेश विक्रांत मुंबई, साहित्य भूषण डॉ. दयाराम मौर्य, जसरा से राम लखन प्रजापति, लखनऊ से इं सुनील बाजपेई, डॉ. रश्मि शील, अरुण तिवारी, कुमार तरल, बाराबंकी से योगेन्द्र मधुप, शिक्षाविद रत्नेश कुमार गौतम, हरि नाथ शुक्ल हरि,नरेन्द्र प्रताप शुक्ल, अनीस देहाती , कुंजबिहारी मौर्य, प्रबंधक डॉ. देवमणि तिवारी, डॉ. शिवम् तिवारी सहित संस्थान के सम्मानित कवि रामेश्वर सिंह निरास, राजेंद्र शुक्ल अमरेश, जगदम्बा तिवारी मधुर, सब्बीर अहमद सूरी एवं डॉ. अभिमन्यु पाण्डेय आदि को तुलसी एवं जायसी सम्मान से अलंकृत किया गया। साहित्यिक समारोह में पधारे साहित्यकारों का आभार अवधी साहित्य संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अर्जुन पाण्डेय ने किया।

कार्यक्रम का संचालन प्रख्यात साहित्यकार डॉ. शिवम तिवारी ने किया। इस मौके पर सैकड़ों की संख्या में साहित्य प्रेमी एवं छात्र- छात्राएं उपस्थित रहे।।

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