-इलाज के लिए कर्मचारी कर रहे लंबा इंतजार
सामना संवाददाता / मुंबई
सरकारी अस्पतालों का सही तरीके से संचालन करने का ढोल पीटने वाली मनपा के केईएम, नायर और सायन अस्पतालों में बड़े-बड़े इलाज होते हैं। लेकिन सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या ज्यादा होने से अपने ही कर्मचारियों का इलाज करवाने में मनपा को सात से आठ महीने लग जाते हैं। इस वजह से मनपा के अग्निशमन कर्मियों के स्वास्थ्य की जांच निजी अस्पताल अपोलो क्लिनिक में होगी और दो वर्षों के लिए मनपा १ करोड़ ४२ लाख ४० हजार रुपए का भुगतान करेगी। इससे अब यह सवाल पैदा हो रहा है कि क्या मनपा प्रशासन को अपने ही अस्पतालों पर भरोसा नहीं है? मनपा के हर बड़े अस्पताल में हर बीमारी का इलाज और हर तरह के मेडिकल जांच की व्यवस्था उपलब्ध होने के बावजूद यह सवाल उठ रहा है कि मनपा यह पैसा क्यों खर्च कर रही है।
नगर निगम के अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों की ४० साल की सेवा के बाद हर साल स्वास्थ्य जांच होती है। पहले यह जांच नगर निगम के अस्पताल में होती थी, लेकिन अब यह स्वास्थ्य जांच निजी अस्पताल अपोलो क्लिनिक में की जा रही है। वर्ष २०२५ में १,६०० अधिकारियों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य जांच का खर्च ४,३०० रुपए प्रति व्यक्ति आएगा, जो ६८ लाख ८० हजार रुपए होगा। वर्ष २०२६ में औसतन १,६०० कर्मचारियों और अधिकारियों की जांच की जाएगी। इसके लिए दर में ३०० रुपए की वृद्धि की गई है और प्रत्येक व्यक्ति को ४,६०० रुपए देने होंगे। इससे मनपा पर ७३ लाख ६० हजार रुपए का खर्च आएगा। इस प्रकार इन दो वर्षों का खर्च १ करोड़ ४२ लाख ४० हजार रुपए तक पहुंच जाएगा।
महानगरपालिका का कहना है कि भीड़ के कारण निजी अस्पतालों में अग्निशमन कर्मचारियों की जांच नहीं हो पा रही है। मुंबई महानगरपालिका के अस्पतालों में मरीजों की भीड़ के कारण कर्मचारियों की स्वास्थ्य जांच में ७ से ८ महीने लग जाते हैं।
