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न्यूज स्कैन : धोखे की आग में जला प्यार, ६७ साल के प्रेमी ने ३० की प्रेमिका को चाकू से उतारा मौत के घाट

खुशबू सिंह

कल्पना कीजिए, एक ऐसा बंधन जहां उम्र सिर्फ एक आंकड़ा हो और दिल की धड़कनें सब कुछ हों। लेकिन क्या होता है जब वही प्यार, जलन की आग में जलकर राख हो जाए? छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से निकली ये कहानी दिल दहला देनेवाली है। एक ६७ साल के किसान की आंखों में छिपी वो तीव्र जलन, जो ३० साल की एक जवान मां की जिंदगी को हमेशा के लिए छीन ले गई। ये सिर्फ एक हत्या की खबर नहीं, बल्कि एक टूटे हुए दिल की चीख है, जो समाज के उन कोनों को उजागर करती है जहां रिश्ते चुपके से पनपते हैं और कभी-कभी मौत बन जाते हैं।
कैसे हुई प्यार की शुरुआत?
पुष्पा मारकंडे, वो नाम जो कभी हंसी-खुशी की मिसाल था, आज दुख की स्याही से लिखा जा रहा है। ३० साल की ये मां, अपने छोटे से बच्चे की गोद में थकी हुई मुस्कान लिए शाम के समय यात्री प्रतीक्षालय की ओर बढ़ रही थी। जीवन की उलझनों के बीच, उसके कंधों पर था एक साल से जेल की सलाखों के पीछे वैâद पति का बोझ। रायपुर की जेल में बंद उसके पति की अनुपस्थिति ने घर को सूना कर दिया था। तभी तो हसदा गांव के किसान जगन्नाथ मारकंडे ने कदम रखा मदद के बहाने और धीरे-धीरे एक अवैध रिश्ते का रूप ले लिया। जगन्नाथ उम्र में पुष्पा से दोगुना, लेकिन प्यार में बराबर का साथी बन गया। घर आता-जाता, छोटे-मोटे कामों में हाथ बंटाता और शायद पुष्पा को वो अकेलापन महसूस न होने देता, जो विधवा जैसा था। लेकिन प्यार की ये मिठास कब कड़वी हो गई किसी को पता न चला।
क्या हुआ था उस दिन?
जगन्नाथ का दिल जलन की चिंगारी से सुलगने लगा। उसे शक सताने लगा, क्या पुष्पा का कोई और है? वो नजरें जो कभी मोहब्बत से चमकती थीं, अब गुस्से की लपटों से भरी थीं। उस दिन का वो पल, जैसे किस्मत का क्रूर खेल था। पुष्पा बच्चे को गोद में लिए अंधेरे की आड़ में चल रही थी। जगन्नाथ पहले से घात लगाए खड़ा था, हाथ में चमकता चाकू और दिल में जहर। जैसे ही पुष्पा नजदीक आई, चाकू ने किया अपना कहर। पीठ पर, पेट पर, एक के बाद एक वार, इतने तेज कि खून की धाराएं बहने लगीं। मां की चीखें गूंजीं, लेकिन सबसे ज्यादा दर्दनाक था वो मंजर जब छोटा बच्चा अपनी मां को बचाने के लिए दौड़ा। नन्हें हाथों ने चाकू को थामने की कोशिश की और खुद घायल हो गया। दुनिया थम सी गई। एक मां का खून, एक बच्चे का आंसू और एक प्रेमी का पछतावा जो शायद कभी न आए।
मौके पर पहुंची पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। सीएसपी रागिनी मिश्रा ने बताया कि जगन्नाथ को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुष्पा को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने सिर्फ सिर झुका लिया। मौत ने उसे हमेशा के लिए छीन लिया। वहीं वो नन्हा सा योद्धा जो अपनी मां की याद में जूझ रहा है। पुष्पा की वो मुस्कान, जो बच्चे के लिए थी, आज सिर्फ यादों में है। क्या ये शक का अंत है या ऐसी और कहानियां बाकी हैं? धमतरी का ये दर्द हमें सोचने पर मजबूर करता है कि प्यार कितना सुंदर, लेकिन जलन कितनी घातक। भगवान पुष्पा की आत्मा को शांति दे और उसके बच्चे को नई जिंदगी।

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