सामना संवाददाता / श्रीनगर
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला लगातार केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की अपील करते रहे हैं और केंद्र सरकार के वादों का हवाला भी देते रहे हैं, लेकिन अब उन्होंने इस्तीफा देने की धमकी भी दे दी है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिलाने के लिए भाजपा के साथ सरकार बनाने के बजाय वह इस्तीफा देना पसंद करेंगे। दरअसल, दक्षिण कश्मीर में एक जनसभा में उमर ने अपनी ही पार्टी के विधायकों पर निशाना साधते हुए कहा, ‘शायद अगर हमने भाजपा को सरकार में शामिल कर लिया होता, तो हमें बदले में एक तोहफा मिलता। हमें तुरंत राज्य का दर्जा मिल जाता, लेकिन क्या आप यह समझौता करने को तैयार हैं? क्योंकि मैं तैयार नहीं हूं।’ जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, ‘अगर आप तैयार हैं, तो कृपया मुझे बताएं। अगर पूर्ण राज्य का दर्जा पाने के लिए सरकार में भाजपा को शामिल करना जरूरी है, तो कृपया मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लें। किसी दूसरे विधायक को मुख्यमंत्री नियुक्त करें और भाजपा के साथ सरकार बनाएं। मैं ऐसी सरकार बनाने को तैयार नहीं हूं।’
‘मैं इंतजार करूंगा’
अगर मुझे जम्मू-कश्मीर को एक राज्य के रूप में देखने के लिए इंतजार करना पड़ा, तो मैं इंतजार करूंगा। मेरे पार्टी के सहयोगियों को साहस दिखाना होगा और संघर्ष करना होगा। चुनावों में पार्टी की भारी जीत के बाद, मेरे पास दो विकल्प थे। मैंने कभी भी परिस्थितियों को बहाने के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया; इसके बावजूद मुझे पता है कि काम करना कितना मुश्किल होता है।
‘सईद ने बनाया था बहाना’
एक विकल्प यह था कि जो पहले अपनाया गया था, वह था भाजपा को सरकार का हिस्सा बनाना, जैसा कि मुफ्ती मोहम्मद सईद साहब ने २०१५ में किया था और फिर महबूबा मुफ्ती ने २०१६ में किया था। वे भाजपा को सरकार से बाहर रख सकते थे, लेकिन बहाना यह था कि भाजपा को सरकार का हिस्सा इसलिए बनाया गया, क्योंकि जम्मू को प्रतिनिधित्व की जरूरत थी। भाजपा को सरकार में शामिल किए बिना, हमने जम्मू को प्रतिनिधित्व दिया।
