मुख्यपृष्ठनए समाचारभाजपा राज में आत्महत्या करने पर मजबूर अन्नदाता!

भाजपा राज में आत्महत्या करने पर मजबूर अन्नदाता!

-२०२३ में १० हजार से ज्यादा किसानों ने की आत्महत्या

– मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ आगे
एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट ने एक बार फिर ये साबित कर दिया है कि खेती अभी भी फायदे का सौदा नहीं बन पाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब सत्ता संभाली थी तब यह कहा गया था कि खेती को अगले कुछ सालों में फायदे का सौदा बनाना है। यानी किसानों को अपनी फसल का लागत मूल्य नहीं बल्कि लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए। लेकिन यह जुमला बनकर ही रह गया। अभी भी किसान घाटे की वजह से आत्महत्या करने को मजबूर हैं।
बता दें कि पीएम मोदी ने २०१४ में केंद्र की सत्ता संभाली तो एक संकल्प लिया। अगले पांच से दस साल में खेती को फायदे का सौदा बनाया जाएगा और किसानों की आय में इजाफा किया जाएगा। किसानों को लागत मूल्य नहीं बल्कि लाभकारी मूल्य मिलेगा। इसके लिए प्रयास भी हुए लेकिन यह मुमकिन नहीं हो पाया। मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बन गए हैं लेकिन एनसीआरबी की २०२३ की ताजा रिपोर्ट जो आंकड़े बता रही है वो यह दिखा रहे हैं कि किसान अभी भी आत्महत्या करने को मजबूर हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने किसानों की आत्महत्या को लेकर एक चौंकानेवाली रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, २०२३ में कृषि से जुड़े १० हजार से ज्यादा लोगों ने आत्महत्या की, जिसमें किसान और कृषि मजदूर दोनों शामिल हैं। आत्महत्या के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र (३८.५ फीसदी) और कर्नाटक (२२.५ फीसदी) में मिले हैं, वहीं कुछ राज्यों में आत्महत्या के एक भी मामले सामने नहीं आए हैं, जिनमें पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, गोवा आदि राज्य शामिल हैं।

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