मुख्यपृष्ठस्तंभकृत्रिम बुद्धि बढ़ा रही है नेताओं में अमरता की उम्मीद

कृत्रिम बुद्धि बढ़ा रही है नेताओं में अमरता की उम्मीद

प्रमोद भार्गव

दुनिया के दो शक्तिशाली देशों के नेताओं में अमरता की लालसा जागी है। चीन की राजधानी बीजिंग में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति षी जिनपिंग ‘हॉट माइक‘ बातचीत में अमरता की संभावना पर चर्चा करते देखे गए हैं। दोनों नेता जैव प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए अंग-प्रत्यारोपण कराकर 150 साल तक जीने की कल्पना पर बातचीत कर रहे थे। उनकी बात अब तक अनुत्तरित बने प्रश्न अमरता को लेकर थी। ये दोनों द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ पर आयोजित सैन्य परेड के दौरान कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे। इसी बीच कैमरे और माइक ने उनकी निजी बातचीत को कैद कर लिया। यही नहीं जब पुतिन और षी मंच की ओर बढ़े, तब उनके अनुवादक को चीनी भाशा में बोलते हुए सुना, ‘बायोटेक्नोलॉजी लगातार विकसित हो रही है, इंसानी अंगों का निरंतर प्रत्यारोपण किया जा सकता है। जितना लंबा जीवन होगा मनुश्य उतना ही युवा अनुभव करेगा। यहां तक की अमरता भी प्राप्त की जा सकती है।‘ उत्तर में शी जिनपिंग की आवाज सुनाई दी, ‘कुछ लोग अनुमान लगाते हैं कि इस सदी में इंसान 150 साल की आयु हासिल कर लेगा।’ यही नहीं इस बातचीत की पुतिन ने पत्रकारों के सामने पुष्टि भी की।
बुढ़ापे से मुक्ति और अमरता की लालसा मनुष्य की चिर महत्वाकांक्षा रही है। अमरता का दूसरा पहलू युवा-अवस्था को बनाए रखना भी है, जिससे सत्ता और स्त्री-सुख अनंतकाल तक भोगे जा सकें। यह अमरता शारीरिक अर्थात भौतिक है। परंतु एक अमरता वह भी है, जिसे कर्मशील महापुरुषों में देखते हैं और उन्हें युग-युगांतरों से जानते हैं। अलबत्ता अब वैज्ञानिक शारीरिक अमरता की ओर बढ़ रहे हैं। यानी बुढ़ापे से दुखी हो रहे लोगों के लिए यह अच्छी खबर है कि भविष्य में न तो आपकी आंतरिक कोशिकाओं का क्षरण होगा और न ही चेहरे पर झुर्रियां उभरेंगी। जी हां, वैज्ञानिकों ने उस जीन की खोज कर ली है, जो शरीर में बुढ़ापा लाती है। विस्कॉन्सिन विश्व-विद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. वॉन जूली ने बुढ़ापा लाने वाली स्तंभ कोशिका मैनसेक्यमाल को खोज लिया है। शरीर में इसी की कमी से बुढ़ापा आता है। इन कोशिकाओं को दवाओं के जरिए पुनजीर्वित किया जाएगा। हालांकि कनाडा के अरबपति पीटर निगार्ड स्टेम सेल के एक वर्ष में चार बार इंजेक्शन लगवाकर अपना बुढ़ापा रोकने का दावा कर रहे हैं। अमेरिकी वैज्ञानिक रे कर्जबील ने भी 2009 में ऐसा ही दावा किया था। उन्होंने बुढ़ापा रोकने के प्रयोग को ‘लॉ ऑफ एक्सीलरेटिंग रिटर्न्स’ नाम दिया हुआ है। इस प्रयोग में नैनो तकनीक के जरिए क्षरित कोशिकाओं को पुनजीर्वित किया जाएगा। सिलिकॉन वैली के अरबपति इसी उम्मीद में आगे बढ़ रहे हैं। वे मानते है कि उम्र बढ़ाना एक जैविक तकनीकि समस्या है। जिसे चिकित्सा विज्ञान और एआई की मदद से हल किया जा सकता है। लेकिन ये दावे कितने व्यावहारिक हैं, यह अभी भविश्य के गर्भ में ही है।
दरअसल कैर्लिफॉर्निया विश्वविद्यालय ने चूहों पर एक प्रयोग किया है। उन्होंने एक बूढ़े और जवान चूहों को जोड़कर उनके खून का आदान-प्रदान किया। परिणाम यह निकला कि बूढ़े चूहे के अंग फिर से जवान हो गए। इस प्रयोग ने ‘फाउंटेन ऑफ यूथ’ की अवधारणा को वैज्ञानिक आधार दिया। टेक उद्यमी ब्रायन जॉनसन ने अपने बेटे का रक्त लेकर स्वयं पर प्रयोग किया। साथ ही, संयमित भोजन और शारीरिक अभ्यास के जरिए अपनी जैविक उम्र को घटाने का दावा किया है। उनका मानना है कि यदि शरीर को आयु बढ़ने से रोका जा सके तो हर बीमारी का उपचार समय रहते मिल सकता है। इसे ‘लॉन्गेविटी एस्केप वेलोसिटी’ कहा गया है। यह एक काल्पनिक स्थिति मानी गई है। जिसमें लोगों की जीवन प्रत्याशा उम्र बढ़ने की दर से कहीं अधिक तेजी से बढ़ती है।
कुछ लोग खुद को कृत्रिम बुद्धि से जोड़कर ‘पोस्ट ह्यूमन’ बनने की तैयारी में हैं। तो कुछ ब्रायन जॉनसन की तरह युवा खून और बायो हैकिंग के जरिए शरीर को फिर से जवान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जैविक हैकिंग में व्यक्ति अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर खान-पान, व्यायाम एवं तकनीक के जरिए शरीर को बेहतर बनाने में जुट जाते हैं। जबकि पोस्ट ह्यूमन एक ऐसी अवधारणा है, जो मनुष्य को मानव होने की पारंपरिक सीमाओं से परे एक ऐसी स्थिति में देखती है, जिसमें एआई और जैव तकनीक से आनुवंशिक क संशोधन कर उम्र को बढ़ाने के उपक्रम किए जाते है। हालांकि ये सभी उपाय ऐसे है, जिनके प्रयोग केवल अमीर लोग ही कर सकते हैं। आम आदमी के लिए जैव तकनीक की सुविधाएं महंगी होने के कारण आसान नहीं होंगी। ऐसे में ये योजनाएं आम बुजुर्गों के लिए तब और कठिन हो गई हैं, जब पूंजीपति देश कल्याणकारी योजनाओं में निरंतर कटौती कर रहे हैं। अमेरिका में चिकित्सा सुविधा से जुड़े बजट में कटौती कर दी गई है। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका में एआई, जैव तकनीक और अमरता से जुड़े शोध को सरकारी मदद बढ़ा दी है।
दरअसल जीन वैज्ञानिकों का मानना है कि मानव शरीर में जो सॉफ्टवेयर क्रियाशील है, वह पाषाण युगीन है। उसे वर्तमान युग के अनुरूप बदलने की जरूरत है। उसमें सक्रिय रक्तकणों की जगह नैनोबोट्स को प्रत्यारोपित किया जाएगा, जो रक्त कणों की तुलना में कई हजार गुना ज्यादा गति से सक्रिय रहेंगे। कैलिफोर्निया लाइफ कंपनी के वैज्ञानिक सिंथिया कैन्यून ने ऐसा गोलकृमि उत्सर्जित किया है, जो अपनी प्राकृतिक उम्र से 10 गुना ज्यादा जी सकेगा। यह चमत्कार बुढ़ापे के कारक डैफ-2 जीन को निष्क्रिय करके किया गया है। यदि वाकई जवानी स्थिर हो जाती है तो इंसान सांस लिए बिना 15 मिनट तक दौड़ सकेगा। चार घंटे तक बिना ऑक्सीजन के जल में स्कूबा डाइविंग कर सकेगा। लेकिन बुढ़ापा रोकने की तकनीक आसान होने तक प्रतीक्षा करिए और 25 से 30 करोड़ का प्रबंध भी कर लिजिए, तब कहीं जाकर बुढ़ापे से बचने के उपाय की उम्मीद पालिए।
दरअसल वैज्ञानिकों ने बुढ़ापे की उस जीन को खोज निकाला है, जो उम्र बढ़ाने के साथ बुढ़ापा लाती है। इस जीन का जीएटीए-4, एएचएच, एफओएक्स-1 नाम से नामाकरण किया गया है। इस जीन के विपरीत वैज्ञानिकों ने उस जीन का भी पहचाना है, जो दांत, दिल, आंत और फेफड़ों को विकसित करने में अहम् भूमिका निभाती है। इस जीन को जीएटीए-6 नाम दिया गया है। बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा करने की दिशा में इजरायली वैज्ञानिकों ने दूसरी प्रक्रिया को आधार बनाया है। इन्होंने मानव गुणसूत्रों (क्रोमोसोम्स) के सिरों पर मौजूद टेलोमेयर की लंबाई को कम कर दिया है। इन वैज्ञानिकों का दावा है कि गुण-सूत्रों के मुहानों में विकसित करने वाले जीन होते हैं। बहरहाल. अभी यह कहना मुश्किल है कि प्रकृति के विरुद्ध वैज्ञानिकों के ये दावे भविष्य में कितने सार्थक सिद्ध होते हैं।
हमें ऐसा यौवन या अमरत्व पा लेने की कथा महाभारत में मिलती है। हैहय वंश के ययाति प्रतापी सम्राट माने गए हैं। ययाति ने शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी और दैत्यराज वृषपर्वा के पुत्री शर्मिष्ठा से विवाह किए थे। तत्पश्चात भी ययाति वासना का दास रहा। उसने बुढ़ापे में भी स्त्री-सुख भोगने के लिए अपने पुत्र पुरू का यौवन प्राप्त किया। यह तरीका ठीक वैसा ही है, जैसा टेक उद्यमी जॉनसन ने अपने बेटे का खून लेकर खुद को युवा बनाने का काम किया है। ययाति का प्रसंग इस तथ्य का संकेत सूत्र है कि रामायण और महाभारत के युग में कोई विधि ऐसी जरूर थी, जिसके माध्यम से बूढ़े ययाति ने युवा बेटे का यौवन अपने शरीर में प्रत्यारोपित करा लिया था। यानी पुत्र की उन कोशिकाओं को प्राप्त कर लिया था, जो ययाति का बुढ़ापा थाम सकती थीं। उस कालखंड में शुक्राचार्य शुक्राणु विधि-प्रत्यारोपण में पारंगत माने जाते थे। संभव है, उन्होंने ही पुरु का यौवन ययाति में प्रत्यारोपित किया हो, ययाति ने जब अपने राज्यों को पुत्रों में बंटवारा किया तो सबसे बड़ा भूभाग प्रतिश्ठानपुर (प्रयाग) पुरू को ही पुरस्कार स्वरूप दिया था। यहीं से पुरू या पौरव वंश की शाखा निकली। लेकिन पुतिन और शी की अमरत्व प्राप्त करने की लालसाएं तानाशाह बने रहकर साम्रज्य विस्तार से जुड़ी हो सकती हैं ?
(साहित्यकार एवं वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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