सामना संवाददाता / मुंबई
पिछले दिनों हुई बारिश ने उल्हासनगर महानगरपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोलकर रख दी है। बताया जाता है कि मनपा अंतर्गत ठेकेदारों द्वारा खराब गुणवत्ता की सड़कों के निर्माण के कारण सड़कें बारिश में बह गर्इं। यही नहीं पूरे शहर की सड़कों पर गड्ढों की भरमार दिखाई दे रही है। बताया जाता है कि मनपा में अधिकतकर ठेकेदार सत्तारूढ़ भाजपा और शिंदे गुट से जुड़े हुए हैं। जो सालों से मनपा के पीडब्ल्यूडी विभाग पर कब्जा जमाए बैठे हुए हैं। यही कारण है कि पीडब्ल्यूडी विभाग के इंजीनियरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से शहर में घटिया काम किए जाते हैं। जिसके कारण शहर की सड़कें हों या अन्य निर्माण कार्य वह अवधि से पहले ही ढह जाते हैं।
बताया जाता है कि मनपा में काम करनेवाले ठेकेदार तकरीबन ४२ प्रतिशत रकम कमीशन के रूप में मनपा के तथाकथित अधिकारियों सहित अन्य लोगों में वितरित कर देते हैं। इसके बाद ठेकेदार बाकी की रकम रखते हैं। बाद में बची हुई ४० प्रतिशत रकम में सड़क निर्माण आदि कार्यों में थूक लगाने का काम करते हैं।
बता दें कि मूसलाधार बारिश ने उल्हासनगर की सड़कों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। जगह-जगह गड्ढों से वाहनचालकों को परेशानी हो रही है। गड्ढों की समस्या को दूर करने के लिए मनपा आयुक्त ने खुद दस जगहों पर जाकर निरीक्षण किया और सड़कों की हालत देखकर आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने दिखावटी तौर पर अधिकारियों को फटकार लगाई और तत्काल मरम्मत कार्य शुरू करने का आदेश दिया।
सड़क दुर्घटनाओं में हुआ इजाफा
उल्हासनगर शहर में धोबी घाट रोड, कल्याण मुरबाड रोड, खेमानी भाजी मार्वेâट चौक, खेमानी चौक, माणिक जीरा चौक, सेंट्रल पुलिस स्टेशन से मयूर होटल रोड, फ्लावर लाइन चौक, कल्याण-बदलापुर रोड, छत्रपति शाहू महाराज फ्लाईओवर, लालचक्की से उल्हासनगर रेलवे स्टेशन रोड, वीनस चौक से नेताजी चौक की सड़कें पूरी तरह से उखड़ गई हैं। यानी बड़े-बड़े गड्ढे पड़ गए हैं। सड़कों पर पड़े गड्ढों में पानी भर जाने से गड्डे दिखाई न देने से दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने के कारण सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में इजाफा हुआ है।
