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मुलुंड सड़क परियोजना पर घोटाले के बादल!.. हाई कोर्ट ने जांच समिति गठित करने का दिया आदेश

सामना संवाददाता / मुंबई

कॉलेज की पढ़ाई के दौरान सार्वजनिक प्रशासन में रुचि रखने वाली एक १९ वर्षीया छात्रा ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत आवेदन दाखिल करना शुरू कर दिया। उसे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उसे मिली जानकारी से २०१८ में स्वीकृत मुलुंड सड़क परियोजना में बढ़ा-चढ़ाकर किए गए भुगतान, फर्जी ट्रक नंबर और लगभग ९० लाख रुपए के दुरुपयोग का पर्दाफाश होगा। इसके बाद छात्रा ने इस संबंध में उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की। अदालत ने भी उसकी याचिका पर संज्ञान लिया और मनपा को आरोपों की जांच के लिए अतिरिक्त आयुक्त और मुख्य अभियंता की दो सदस्यीय समिति गठित करने का आदेश दिया।
घाटकोपर की बैचलर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (बीएमएस) की छात्रा आयमन शेख ने यह याचिका दायर की थी। उसकी याचिका में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। न्यायमूर्ति रेवती मोहिते-डेरे और न्यायमूर्ति संदेश पाटील की पीठ ने यह भी कहा कि युवा ऐसे मामलों में रुचि ले रहे हैं, हमें उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए। आयमन ने सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि नागरिक अधिकार और सूचना के अधिकार अधिनियम पर कॉलेज के अभियान ने उन्हें सार्वजनिक ठेकों की जांच करने के लिए प्रेरित किया। २०२१ में उन्होंने मुलुंड रोड परियोजना के बारे में जानकारी के लिए आरटीआई के तहत आवेदन किया था और कई अपीलों के बाद छात्रा को दी गई जानकानी में परियोजना में हुई अनियमितता की बात सामने आ गई।
फर्जी निकला ट्रक नंबर
-परियोजना में काम के लिए इस्तेमाल किए गए पांच ट्रकों के नंबर वास्तव में मोटरसाइकिल के रूप में पंजीकृत थे, जबकि तीन अन्य वाहनों के नंबरों पर कोई पंजीकरण जानकारी ही नहीं थी।
-सहायक अभियंता ने इन बढ़े हुए बिलों को मंजूरी दी थी। इस वजह से छात्रा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर करके यह आरोप लगाया कि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया गया।
-आयमन ने अपनी याचिका में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच करने और दोषी पाए जाने पर आपराधिक कार्रवाई करने की मांग की है।

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