मुख्यपृष्ठस्तंभनिवेश गुरु : सेविंग और इन्वेस्टमेंट का सच... नाम बड़ा या काम?

निवेश गुरु : सेविंग और इन्वेस्टमेंट का सच… नाम बड़ा या काम?

भरतकुमार सोलंकी
मुंबई

कभी डॉक्टर ने नवजात को बादाम खिलाने की सलाह दी हो और मां यह सोचकर उसे काजू खिला दे, क्योंकि दोनों ही ‘मेवे’ हैं। अब मां को कौन समझाए कि बादाम और काजू का रिश्ता उतना ही दूर है, जितना सेविंग और इन्वेस्टमेंट का। लेकिन हमारी आदत है, नाम देखकर ही संतोष कर लेना।
ठीक यही खेल वित्तीय दुनिया में चलता है। बीमा बेचने वाला एजेंट कहेगा, ‘ये तो इन्वेस्टमेंट है।’ सोने-चांदी का सोनार कहेगा, ‘यही सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट है।’ और सामने बैठा ग्राहक सिर हिलाता रहेगा, ‘हां, हां, बिल्कुल।’ असल में यह हां उतनी ही मासूम है जितनी उस मां की, जिसे अदरक के डिब्बे पर सोंठ लिखकर पकड़ा दिया जाए।
अब जरा सच्चाई पर आइए। सेविंग और इन्वेस्टमेंट में फर्क उतना ही है, जितना अजवाइन और जीरे में। दिखने में छोटे-छोटे, लेकिन असर में जमीन-आसमान का अंतर। अजवाइन से पेट सुधरे और जीरा खाने से गड़बड़ हो जाए, तो क्या आप कहेंगे, ‘दिखने में तो दोनों बीज हैं, फर्क क्या है?’
हाल ही में एक पारिवारिक मिलन में चार युवा मुझे बड़े आत्मविश्वास से सोना-चांदी के सट्टे और ट्रेडिंग को इन्वेस्टमेंट बताते मिले। मैंने पूछा, ‘इन्वेस्टमेंट और सेविंग में फर्क कौन बताएगा?’
सबकी हालत ऐसी हो गई जैसे परीक्षा में सवाल आए और उत्तर पुस्तिका खाली छोड़नी पड़े।
सच यह है कि हमारी समझ गलत नामों में उलझकर रह गई है। सेविंग को इन्वेस्टमेंट कहकर पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ा दिया गया है। मानो नाम बदलते ही चीज का असर भी बदल जाएगा।
सेविंग का मतलब है – गद्दे के नीचे की सुरक्षा।
इन्वेस्टमेंट का मतलब है – भविष्य का असली ग्रोथ और संपत्ति निर्माण।
लेकिन अफसोस, हम गद्दे के नीचे रखे पैसे को भी इन्वेस्टमेंट मान लेते हैं और फिर शिकायत करते हैं कि हमारी दौलत क्यों नहीं बढ़ रही।
तो जरा संभलिए – नाम से नहीं, काम से पहचानिए। वरना, गलत डिब्बे पर लिखा नाम और झूठी परंपराएं आपको केवल धोखा देंगी, फायदा कभी नहीं।
(लेखक आर्थिक निवेश मामलों के विशेषज्ञ हैं)

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