मुख्यपृष्ठनए समाचारसंभल मस्जिद प्रकरण में दाखिल याचिका हाईकोर्ट में खारिज

संभल मस्जिद प्रकरण में दाखिल याचिका हाईकोर्ट में खारिज

राजेश सरकार / प्रयागराज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शनिवार को अपने एक फैसले में यूपी के चर्चित संभल जिले में मस्जिद का ध्वस्तीकरण रोकने संबंधी याचिका खारिज कर दी। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में तालाब की जमीन पर बने मस्जिद के ध्वस्तीकरण मामले में मस्जिद कमेटी की ओर से तत्काल सुनवाई की याचिका दायर की गई थी। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि मुस्लिम पक्ष चाहें तो इस आदेश के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में अपील कर सकता है। शनिवार सुबह मामले की सुनवाई जस्टिस दिनेश पाठक की सिंगल बेंच ने की। इससे पहले शुक्रवार को भी छुट्टी के दिन अर्जेंट बेंच बैठाकर मामले की सुनवाई की गई थी। मस्जिद शरीफ गोसुलबारा रावा बुजुर्ग और मुतवल्ली मिंजर की ओर से दाखिल याचिका में ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी।मस्जिद पक्ष की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के अंतर्गत सक्षम न्यायालय ने 2 सितंबर 2025 को ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से राहत की मांग की थी। अधिवक्ता अरविंद कुमार त्रिपाठी और शशांक श्री त्रिपाठी ने मस्जिद कमेटी का पक्ष रखा, जबकि सरकार की ओर से चीफ स्टैंडिंग काउंसिल जेएन मौर्य और आशीष मोहन श्रीवास्तव पेश हुए।

– ध्वस्तीकरण पर मस्जिद पक्ष का तर्क
याचिका में कहा गया कि प्रशासन ने गांधी जयंती और दशहरे जैसे त्योहार के दिन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। आरोप है कि तालाब की जमीन पर बने अवैध मैरिज हाल को दो अक्टूबर को चार बुलडोजरों की मदद से महज चार घंटे में ढहा दिया गया।मस्जिद का कुछ हिस्सा भी सरकारी जमीन पर बना हुआ है, जिस पर प्रशासन ने अवैध निर्माण का नोटिस जारी किया था। मस्जिद कमेटी को चार दिन की मोहलत दी गई थी, लेकिन मोहलत समाप्त होने से पहले ही मस्जिद कमेटी के लोगों ने खुद हथौड़ा चलाकर मस्जिद की दीवारें गिरानी शुरू कर दी। मस्जिद पक्ष ने यह भी आशंका जताई कि बुलडोजर कार्रवाई के दौरान भीड़ की वजह से बड़ा हादसा हो सकता था।

– कोर्ट का निर्देश
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मस्जिद पक्ष से जमीन के कागजात दाखिल करने को कहा था। हालांकि शनिवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि याची अब ट्रायल कोर्ट में अपील कर सकता है। राज्य सरकार, डीएम, एसपी संभल, एडीएम, तहसीलदार और ग्राम सभा को इस मामले में पक्षकार बनाया गया था।

अन्य समाचार