– संगम नगरी का अक्षयवट वृक्ष भी शामिल
राजेश सरकार / प्रयागराज
सौ साल और उससे ज्यादा उम्र के वृक्षों को यूपी सरकार संरक्षण और संवर्धन प्रदान करेगी। प्रदेश सरकार ने २८ प्रजातियों के कुल ९४८ वृक्षों को विरासत (हेरीटेज) वृक्ष घोषित किया है। इनमें प्रयागराज के यमुना नदी के तट पर बने ऐतिहासिक किले में मौजूद पवित्र अक्षयवट वृक्ष भी शामिल है। वृक्षों का चयन उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा गैर वन क्षेत्रों (सामुदायिक भूमि) पर किया गया है। उल्लेखनीय है कि भारत में प्राचीन काल से ही वृक्षों की पूजा, संरक्षण और संवर्धन की परंपरा रही है। बरगद, पीपल, बेल, नीम, आंवला, समी,आम जैसे वृक्ष ना केवल पारिस्थितिकी दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं बल्कि देश की धार्मिक व सांस्कृतिक मान्यताओं से भी गहराई से जुड़े हैं। इन्हीं परम्पराओं को जीवित रखने और विलुप्त हो रही प्रजातियों के संरक्षण की दृष्टि से इन वृक्षों को विरासत वृक्ष का दर्जा दिया गया है।
– स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े वृक्ष भी शामिल
घोषित विरासत वृक्षों में लखनऊ और वाराणसी के क्रमशः दशहरी आम और लंगड़ा आम के मातृ वृक्ष, फतेहपुर का बावन इमली, मथुरा के इमलीतला मंदिर परिसर का प्राचीन इमली वृक्ष, प्रतापगढ़ का करील वृक्ष, बाराबंकी का एडनसोनिया वृक्ष, हापुड़ व संत कबीर नगर के पाकड़ वृक्ष, सारनाथ का बोधि वृक्ष और अम्बेडकर नगर का पीपल वृक्ष शामिल हैं। इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े कई वृक्ष भी हेरीटेज सूची में शामिल हैं।शाहजहांपुर की ऑर्डिनेंस क्लॉथ फैक्ट्री का पीपल वृक्ष, प्रयागराज किले का अक्षयवट, उन्नाव का वाल्मीकि आश्रम स्थित बरगद और लखनऊ एनबीआरआई परिसर का बरगद इस सूची का हिस्सा हैं। बता दें कि चीनी यात्री ह्वेनसांग द्वारा वर्णित प्रयागराज (झूंसी) का एडनसोनिया वृक्ष, मथुरा का टेर कदम्ब मंदिर परिसर स्थित पीलू वृक्ष तथा निधिवन का पौराणिक वृक्ष विशेष महत्व रखते हैं। गाजियाबाद के महामाया देवी मंदिर परिसर में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा बरगद वृक्ष भी विरासत वृक्ष घोषित किया गया है।
– वृक्षों पर आधारित कॉफी टेबल बुक तैयार
प्रदेश सरकार ने इन वृक्षों पर आधारित कॉफी टेबल बुक तैयार की है, जिसमें प्रत्येक विरासत वृक्ष की जानकारी, आकर्षक छायाचित्र, हिन्दी-संस्कृत नाम, वानस्पतिक नाम, आयु, जियो लोकेशन और मानचित्र सम्मिलित है। इसका पहला और दूसरा संस्करण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जारी किया गया। बुक में क्यूआर कोड आधारित सर्च सिस्टम और वृक्ष संरक्षण से जुड़े वीडियो भी शामिल किए गए हैं, जिससे आमजन आसानी से जानकारी प्राप्त कर सकें।
