मुख्यपृष्ठसमाज-संस्कृतिपूर्व छात्र का सम्मान समारोह संपन्न

पूर्व छात्र का सम्मान समारोह संपन्न

 मुंबई : हितेन शंकराव वेणगांवकर, हिंदी विद्या प्रचार समिति के रामनिरंजन झुनझुनवाला कॉलेज (एम्पावर्ड ऑटोनॉमस) के गौरवशाली पूर्व छात्र, का सम्मान समारोह ४ अक्टूबर २०२५ को सबू हॉल में बड़े गर्व और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। डॉ. उषा मुकुंदन, निदेशक, एच.वी.पी.एस., ने अपने उद्बोधन में कहा कि आर.जे. कॉलेज का एक छात्र बॉम्बे हाईकोर्ट का न्यायाधीश बना है, यह संस्था के लिए अत्यंत गौरव की बात है। उन्होंने उनकी मेहनत, लगन और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि वे सभी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा हैं।

डॉ. राजेंद्र सिंह, अध्यक्ष, एच.वी.पी.एस., ने हिंदी विद्या प्रचार समिति की ओर से न्यायमूर्ति वेणगांवकर का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने यह शुभ समाचार डॉ. उषा मुकुंदन और डॉ. हिमांशु दावड़ा को सुनाया, तो उनके चेहरे पर गर्व और प्रसन्नता स्पष्ट झलक रही थी। उन्होंने आगे कहा कि आर.जे. कॉलेज के कई पूर्व छात्र आईएएस अधिकारी और मजिस्ट्रेट बने हैं, परंतु बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश बनने वाले पहले पूर्व छात्र के रूप में न्यायमूर्ति वेणगांवकर की नियुक्ति संस्था के लिए गर्व का विषय है।

डॉ. हिमांशु दावड़ा ने माननीय न्यायमूर्ति हितेन शंकराव वेणगांवकर का परिचय दिया और उनके छात्र जीवन से लेकर न्यायाधीश बनने तक की प्रेरणादायी यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उनकी मेहनत, समर्पण और ईमानदारी का परिणाम है। अपने संबोधन में माननीय न्यायमूर्ति वेणगांवकर ने आर.जे. कॉलेज में बिताए अपने दिनों को याद किया — जूनियर कॉलेज से लेकर स्नातक तक की पढ़ाई और फिर गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई से कानून की पढ़ाई तक। उन्होंने अपने मार्गदर्शकों का आभार व्यक्त किया — उन्होंने अपने करियर की शुरुआत श्री दिलीप बाबासाहेब भोसले (जो आगे चलकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने) के सान्निध्य में की। इसके बाद श्री दारियस खंबाटा, तत्कालीन अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया, ने उन्हें केंद्र सरकार के पैनल में शामिल किया, जिससे उन्हें राष्ट्रीय महत्व के मामलों में अनुभव प्राप्त हुआ और उनकी विधिक दृष्टि और पैनी हुई।

न्यायमूर्ति वेणगांवकर ने अपने दो दशक से अधिक के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सीबीआई  और ईडी  जैसी प्रमुख एजेंसियों का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने विजय माल्या और नीरव मोदी प्रत्यर्पण मामले (लंदन, 2021) जैसी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों का भी उल्लेख किया।  २०२३ में महाराष्ट्र राज्य के मुख्य सरकारी वकील और लोक अभियोजक के रूप में उनकी नियुक्ति हुई और वे कोल्हापुर खंडपीठ पर यह दोहरा पद संभालने वाले पहले व्यक्ति बने। इसके बाद अगस्त २०२५ में वे बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त हुए।  कार्यक्रम का संचालन व निवेदन सुश्री स्नेहा देवूसकर ने किया और उन्होंने ही आभार प्रदर्शन भी किया। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। यह अवसर आर.जे. कॉलेज के लिए अत्यंत प्रेरणादायी और गौरवपूर्ण सिद्ध हुआ।

अन्य समाचार