सामना संवाददाता / मुंबई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन के दिन मुंबई और नई मुंबई की यात्री परिवहन व्यवस्था एक बड़े संकट का सामना करने जा रही है। इसके तहत राज्य के ऐप आधारित टैक्सी, वैâब और ऑटो-रिक्शा चालकों ने अपनी विभिन्न समस्याओं के समाधान में सरकार की कथित विफलता के विरोध में नौ अक्टूबर को एकदिवसीय राज्यव्यापी बंद की घोषणा की है। इसके जरिए एक तरह से वे पीएम नरेंद्र मोदी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हुए उनके समक्ष ‘दुखड़ा रोएंगे’। दूसरी तरफ इस हड़ताल के चलते महानगर समेत राज्यभर की सड़कों पर यात्री निश्चित रूप से हलाकान नजर आएंगे।
चालक संगठनों का आरोप है कि महायुति सरकार उनकी समस्याओं को सुनने के बजाय उन्हें परेशान करती है। यही वजह है कि मुंबई समेत राज्य भर में ऐप आधारित टैक्सी, वैâब, और रिक्शा चालकों ने ९ अक्टूबर को एक बड़ी हड़ताल की तैयारी कर ली है, जिससे शहर के नागरिकों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है। यह निर्णय परिवहन विभाग की कथित गलत नीतियों और कुछ निजी कंपनियों द्वारा नियमों के लगातार उल्लंघन के विरोध में लिया गया है। भारतीय ‘गिग कामगार मंच’ के अध्यक्ष डॉ. केशव क्षीरसागर ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मुंबई में रहेंगे इसलिए आंदोलनकारी इसी अवसर का उपयोग करते हुए परिवहन विभाग की नीतियों पर उनका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।
सरकारी नियम ताक पर रखकर अवैध रूप से बड़ी कंपनियां चला रही हैं टैक्सी-ऑटो!
चालकों का फूटा गुस्सा
ऐप आधारित टैक्सी-ऑटो के चालकों की हड़ताल से मुंबई में यात्रियों की मुसीबतें बढ़ने वाली हैं। इन वाहनों को चलानेवाले चालकों का आरोप है कि वे जिन कंपनियों (ओला, उबर, रैपिडो आदि) की गाड़ियां चला रहे हैं, वे सरकारी नियमों की अनदेखी करते हुए राज्य में अवैध रूप से काम कर रही हैं। परिवहन आयुक्त कार्यालय के माध्यम से सरकार ने इन कंपनियों को ऐप पर निर्धारित सरकारी दर दिखाने के निर्देश दिए थे, लेकिन कंपनियों ने इसे लागू नहीं किया।
जुलाई २०२५ में वैâब, रिक्शा और टैक्सी चालकों ने परिवहन विभाग के दुरुपयोग के विरोध में अनशन, हड़ताल और प्रदर्शन किए थे, जिसमें शत-प्रतिशत चालकों ने भागीदारी दिखाई थी।
यात्रियों के लिए सलाह
९ अक्टूबर को प्रस्तावित हड़ताल के कारण ऐप आधारित टैक्सी सेवाएं उपलब्ध नहीं होंगी। इससे सार्वजनिक परिवहन सेवाओं और वैकल्पिक वाहनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, जिससे नागरिकों को बड़े पैमाने पर असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा की योजना पहले से बना लें और वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था अपनाएं।
परिवहन मंत्री पर आरोप
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया है कि राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने रैपिडो कंपनी से प्रायोजकत्व लेने के कारण विभागीय अधिकारियों को कंपनियों के सामने झुकना पड़ रहा है। ३० सितंबर को परिवहन मंत्री ने चालकों के साथ बैठक से इनकार कर दिया था, जिसके बाद आंदोलकारियों ने जेल भरो आंदोलन किया और सैकड़ों ने गिरफ्तारी दी। इसके बाद मुख्यमंत्री के सचिव विद्याधर महाले ने आंदोलनकारियों और परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की और समाधान निर्देश दिए। हालांकि, डॉ. क्षीरसागर के अनुसार, अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है, जिससे चालकों में निराशा है।
