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चुनावी बिगुल से पहले महायुति में कलह… १४ गांवों ने दिखाया गणेश नाईक को ठेंगा!

-बोले, हमारे समाज का ही नेता बना हमारा दुश्मन

-भाजपा बनाम शिंदे गुट का युद्ध तय

-चुनाव से पहले भाजपा में बढ़ी बेचैनी

सामना संवाददाता / मुंबई

स्थानीय निकाय चुनावों से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ताधारी ‘महायुति’ के भीतर कलह दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। यह कलह बीजेपी बनाम शिंदे गुट के बीच मानो ‘युद्ध’ का रूप ले चुका है। इस राजनीतिक टकराव की शुरुआत तब हुई, जब १४ गांवों ने एकजुट होकर मंत्री नाईक को ठेंगा दिखा दिया। इन गांवों ने मंत्री के विरोध में जाकर सीधे तौर पर घाती गुट का समर्थन किया, जिससे मंत्री की सियासी जमीन हिल गई है। इन आक्रोशित ग्रामीणों ने मंत्री नाईक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हमारे समाज का ही नेता हमारा दुश्मन बन गया है। इसके बाद से ही भाजपा में बेचैनी बढ़ गई है।
आगामी मनपा चुनावों से पहले ठाणे जिले की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। यह टकराव सीधे तौर पर उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बनाम वरिष्ठ मंत्री गणेश नाईक के बीच देखने को मिल रहा है। विवाद का केंद्र कल्याण ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के १४ गांवों को नई मुंबई मनपा में शामिल करने का पैâसला है। मंत्री गणेश नाईक ने हाल ही में दोबारा घोषणा की थी कि कल्याण ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के ये १४ गांव चुनाव के बाद मनपा से अलग कर दिए जाएंगे। उन्होंने बिना नाम लिए शिंदे पर निशाना साधते हुए कहा था कि किसी की मर्जी के लिए इन गांवों को एनएमसी में शामिल किया गया था। मंत्री नाईक के बयान से १४ गांवों के ग्रामीणों में भारी रोष है। इन गांवों में बहुसंख्यक समाज के नेताओं पर ही विकास में बाधा डालने का आरोप लग रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर हमारे समाज के नेता ही हमारे विकास के खिलाफ खड़े होंगे, तो हम किस पर भरोसा करें।
भाजपा में भी दरार
इस टकराव ने बीजेपी के भीतर की दरार को भी उजागर कर दिया है। एक तरफ जहां मंत्री नाईक गांवों को मनपा से बाहर करने की बात कर रहे हैं, वहीं ग्रामीणों ने स्थानीय भाजपा विधायक मंदा म्हात्रे की सराहना की है, जिन्होंने गांवों के समावेश का समर्थन किया था। ग्रामीणों का कहना है कि मंत्री नाईक भाजपा नहीं हैं। हमें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का भी समर्थन प्राप्त है।
अचानक विरोध क्यों?
ग्रामीणों का कहना है कि मंत्री नाईक हमें पीछे क्यों धकेल रहे हैं, यह समझ से परे है। इन १४ गांवों से संबंधित सरकारी आदेश को डेढ़ साल हो चुका है। मंत्री नाईक ने खुद भी उस समय इस पैâसले को मंजूरी दी थी, लेकिन अब अचानक वे विरोध क्यों कर रहे हैं? आखिर उनका असली गुस्सा किस पर है? यह समझ से परे है।

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