राजेश विक्रांत
राष्ट्रीय कवि खंडू रघुनाथ मालवे- खरमा की हिंदी काव्य कृति ‘असली सवेरा’ सकारात्मक दुनिया के निर्माण के लिए एक रचनात्मक कोशिश है। यह पुस्तक महाराष्ट्र राज्य मराठी साहित्य संस्कृत मंडल के अनुदान से प्रकाशित है। इसके प्रकाशक राजेश साबले ओतुरकर, राजसा प्रकाशन, उल्हासनगर हैं। पुस्तक का सुंदर कवर कलाकार प्रशांत मालवे ने बनाया है। डॉ मालवे- खरमा की इस पुस्तक में कुल 50 कविताएं हैं। जिसमें अभंग, असली सवेरा, नाम रोशन रहेगा, दुनिया का राज, संतों का संग, सबके साथ, टेंशन मत देना, सब कुछ हम, मालिक एक, जब तक, बढ़ावा देना, बहुत कुछ, किस बात की, ख्याल रखना, प्यारे साथी, खुले आसमान, प्रीत का खेल, ऐसा काम किया, पॉकेट मनी, सनकी, अजीब दुनिया, मौका, सही रे सही, रेल की भाषा, आसान है, कीर्ति रहे अमर, हासिल, बोलता है, ध्यान दें, जिगरी, कफन, किसकी औलाद, जागो रे जागो, जान की बाजी, कहां जाएं, पुरानी यादें, जीने के वास्ते, पाने के लिए प्रांतवार भाषा, अभिप्राय आदि कविताएं हैं।
इन कविताओं के शीर्षकों से लगता है कि कवि अपने जीवन व समाज में जो कुछ भी देखता है वह उन्हें अपनी कविता में प्रकट करता है। ‘असली सवेरा’ की तारीफ इसलिए भी की जानी चाहिए क्योंकि यह एक मराठी भाषी कवि द्वारा हिंदी में लिखने का एक सुंदर प्रयास है। इस संग्रह की शीर्षक कविता ‘असली सवेरा’ देखिए- सुबह और शाम काम ही काम करते रहना है, ना इधर ना उधर किस काम का आगे चलना है, ऐसा पढ़ना दिल में बैठना, कभी चोट ना खाना, सुबह उजाला रात अंधेरा जीने का गीत गाना, मित्र परिवार संसार में सबको संभाल कर चलना, मां-बाप गुरु महापुरुष की सेवा में हमेशा व्यस्त रहना।। एक और कविता ‘दुनिया का राज’ देखिए- कभी भूल नहीं सकता, ये दुनिया का राज है। सितारे आसमान के राज व साज है। अच्छा जीवन जीना है तो, धरती अंबर को हिला दो। संग्राम करना है तो बूंद बूंद की रक्षा करो। अच्छा जीवन बिताना है तो, सबको गले लगाओ। संघर्ष के नारे पर भाई आप एक साथ चलो।। डॉ मालवे- खरमा पश्चिम रेलवे के कर्मचारी रहे हैं। वह लोक नेता है, संपादक है, सोशल मीडिया एक्टिविस्ट है, तथा उन्हें पश्चिम रेलवे कार शेड गोल्ड मेडल, ग्लोबल अर्थ प्रोटेक्शन अवार्ड, डॉ एपीजे अब्दुल कलाम इंटरनेशनल अवार्ड, महात्मा गांधी दर्शन पुरस्कार व डॉ बाबासाहेब अंबेडकर फेलोशिप समेत कई महत्वपूर्ण पुरस्कार व सम्मान मिल चुके हैं। वह अपने आसपास के परिवेश में जो कुछ भी देखते हैं उसे कविता के रूप में व्यक्त कर देते हैं। वे व्याकरण नियम आदि के चक्कर में नहीं पड़ते। वह अपनी भावनाओं को कविता में कह देते हैं।
उनकी एक कविता ‘सब कुछ हम’ कवि की सुंदर भावनाओं की एक ज्वलंत मिसाल है- हम लिख सकते हैं, मगर बोल नहीं सकते। हम चल सकते हैं, धोखा नहीं दे सकते। हम जोड़ सकते हैं, मगर तोड़ नहीं सकते। हम हिल सकते हैं, कारोबार नहीं चल सकता। हम हैं तो दुनिया है, दुनिया को बदल सकते हैं। डॉ मालवे की एक अन्य कविता ‘मौका’ का उदाहरण देखिए- पाप क्या है, बच्चों को देखो। सुख क्या है, आमीर को देखो। दुख क्या है, घर में देखो। दर्द क्या है, दिल में देखो। जन्म क्या है, खेल कर देखो। मृत्यु क्या है, सब देखो।
कवि डॉ मालवे- खरमा ने असली सवेरा के परिचय में लिखा है कि संघर्ष यही मेरा नारा बन कर रहा है। उत्कर्ष होने के लिए दुख को सुख समझ के चलता रहा इसलिए मैंने अपने हिंदी काव्य संग्रह को असली सवेरा शीर्षक दिया। 50 पृष्ठों की इस पुस्तक का मूल्य ₹100 है।
