अनिल पांडेय
कहानी जब सामाजिक सरोकार से जुड़ी हो, उसके पात्र अपने आस-पास दिखते हों तो ऐसी कहानी पाठकों को बांधकर रखती है। ऐसी ही कहानियों का संग्रह है वेश्या की बेटी। इस कहानी संग्रह में असरदार कहानियां हैं, जिसमें भावनाओं और संवेदनाओं का संगम है। हर कहानी का विषय अलग-अलग समय काल का है। कोरोना की त्रासदी से जुड़ी हुई कहानी भी है।
वेश्या की बेटी कहानी संग्रह के कहानीकार नवीन कुमार हैं, जो पेशे से पत्रकार हैं। उनके इस संग्रह में उनकी पत्रकारिता की छाप महसूस होती है खासकर विषयों को लेकर। उसकी सामाजिक संरचना भी अनूठी है। कहानीकार ने भाषा पर काफी ध्यान दिया है। भाषा की सरलता कहानी पढ़ने में प्रवाह बनाए रखती है इसलिए एक-एक कर दो दर्जन कहानियां पढ़ने में दिलचस्पी बनी रहती है। हर कहानी काफी संवेदनशीलता के साथ लिखी गई है। इस संग्रह की पहली कहानी है वेश्या की बेटी। इसमें वेश्याओं के दुख का संसार तो है ही। साथ ही एक मां अपनी बेटी के लिए किस तरह से लड़ाई लड़ती है, उसे संवेदनाओं के साथ पेश किया गया है। इस मां, जो इस धंधे में धकेल दी गई है, की लड़ाई अपनी बेटी को जिस्म बेचने के बाजार से बाहर लाने की है। उसका संघर्ष प्रेरणादायक है। कोरोना की त्रासदी से जुड़ी कई कहानियां हैं, जिसमें ‘एंबुलेंस’ और ‘मुर्दाघर’ झकझोर कर रख देनेवाली कहानियां हैं। सुमेधा की जिद कहानी में सामाजिक विसंगतियां दिखती है। सालगिरह, पोस्टमैन, दिलकश, बंद कर दो दरवाजा, देह दान, रंगभेद और दादी मां कहानियां भी सोचने पर मजबूर करती हैं। इस कहानी संग्रह की प्रस्तावना फिल्म अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने लिखी है। यह कहानी संग्रह नई दिल्ली के प्रकाशक न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन ने प्रकाशित किया है, जिसका मूल्य-३९९ रुपए है। यह किताब अमेजन पर भी उपलब्ध है। साहित्य और कहानी से प्रेम करनेवालों के लिए यह अनूठा कहानी संग्रह है।
