सूफी खान
गाजा युद्ध में इजरायल अमेरिका की मदद के बिना शायद ही लंबे समय तक टिक पाता, लेकिन अब वही इजरायल अमेरिका को आंख दिखा रहा है। जी हां, इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने ७ अक्टूबर, २०२५ को हमास के हमले की दूसरी बरसी पर एक इंटरव्यू में वैश्विक महाशक्तियों को चेतावनी भरा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती और अस्थिर विश्व व्यवस्था में कोई भी सुपर पावर अकेले टिक नहीं सकता और सहयोगियों का साथ सभी को चाहिए। ये बयान अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को अप्रत्यक्ष रूप से संबोधित करते हुए आया, जिसमें नेतन्याहू ने इजरायल को अमेरिका का एक मजबूत और उपयोगी साझेदार बताया। खासकर, ईरान के मिसाइल और न्यूक्लियर कार्यक्रम जैसे साझा खतरों के खिलाफ। यह तारीख इजरायल के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि ठीक दो साल पहले ७ अक्टूबर, २०२३ को हमास ने इजरायल पर सरप्राइज अटैक किया था, जिसमें लगभग १,२०० लोग मारे गए और २५० से अधिक बंधक बनाए गए। नेतन्याहू ने अमेरिका को सुनाते हुए कहा कि अमेरिका फर्स्ट का मतलब अमेरिका अकेला नहीं है क्योंकि सभी देशों को सहयोगियों की जरूरत होती है। सुपर पावर को सहयोगियों की जरूरत होती है। चीन के सहयोगी हैं, रूस के सहयोगी हैं। नेतन्याहू का कहना है कि उन्होंने इजरायल को एक रक्षात्मक देश के रूप में पेश किया, जो खुद की रक्षा करता है बिना विदेशी सैनिकों की मांग किए और पिछले ७७ वर्षों में सफलतापूर्वक ऐसा कर चुका है। बयान का संदर्भ ईरान से जुड़ा है, जिसे नेतन्याहू ने क्षेत्रीय खतरा बताया है। नेतन्याहू ने चेतावनी दी कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम अमेरिका को भी जोखिम में डालते हैं और इजरायल की खुफिया तथा तकनीकी क्षमताएं ऐसी हैं जो महाशक्तियों के पास नहीं हैं, जिन्हें अमेरिका के साथ साझा किया जाता है। इजरायल पर अमेरिकी सहायता की निर्भरता देखते हुए यह बयान कुछ हद तक ‘आंख दिखाने’ जैसा लगता है क्योंकि इजरायल अमेरिकी हथियारों और वित्तीय मदद पर काफी हद तक निर्भर है। हालांकि, नेतन्याहू ने सहयोग पर जोर दिया, ना कि विरोध पर। एक ओर नेतन्याहू इस तरह के बयान दे रहे हैं और दूसरी ओर एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है, जिससे ये लगता है कि अगर अमेरिका न होता तो इजरायल इस जंग में कब का मात खा चुका होता। इससे पहले इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उम्मीद जताई कि आनेवाले दिनों में गाजा से सभी बंधकों की रिहाई की घोषणा हो जाएगी। दूसरी ओर सोमवार को मिस्र में हमास के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता निर्धारित है, जिसमें युद्ध समाप्ति के लिए अमेरिका की नई योजना पर चर्चा होगी। शनिवार की देर रात एक संक्षिप्त बयान में नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने तकनीकी मुद्दों को अंतिम रूप देने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल मिस्र भेजा है। उन्होंने आगे कहा कि इन वार्ताओं को कुछ ही दिनों में पूरा करने का लक्ष्य है। नेतन्याहू का यह बयान हमास द्वारा अमेरिकी योजना की कुछ शर्तों को मानने की घोषणा के बाद आया। राष्ट्रपति ट्रंप ने हमास के इस बयान का स्वागत किया, लेकिन शनिवार को चेतावनी दी कि हमास को तत्काल कदम उठाने होंगे, वरना सभी संभावनाएं समाप्त हो जाएंगी।
