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बिहार में एसआईआर पर फंसा चुनाव आयोग …`जिन लोगों का नाम काटा, तुरंत दो उनका डाटा!’

-सुप्रीम कोर्ट ने ईसी से काटे गए ३.६६ लाख नामों का मांगा हिसाब
बिहार में मतदाता सूची के गहन विशेष पुनरीक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई ९ अक्टूबर को तय की है। इस बीच याचिकाकर्ता नई दलीलों के साथ अपने हलफनामे दाखिल करेंगे, जिन पर निर्वाचन आयोग जवाब देगा। साथ ही कोर्ट ने चुनाव आयोग से उन ३.६६ लाख वोटों की भी जानकारी देने को कहा है जिनके नाम फाइनल वोटर लिस्ट में काटे गए हैं।
बता दें कि मंगलवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि लाखों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, लेकिन उन्हें इसकी कोई सूचना नहीं दी गई। सिंघवी ने आरोप लगाया कि ३.६६ लाख से अधिक लोगों के नाम बिना नोटिस हटाए गए, किसी को कारण नहीं बताया गया। उन्होंने कहा कि अपील का प्रावधान तो है, पर जब लोगों को जानकारी ही नहीं है, तो अपील का सवाल ही नहीं उठता। वहीं एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने बताया कि अब तक ४७ लाख नाम हटाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि २००३ और २०१६ के आयोग के निर्देश बताते हैं कि फर्जी मतदाताओं को हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, लेकिन इस बार पारदर्शिता का पूर्ण अभाव है। भूषण ने कहा कि ६५ लाख मतदाताओं की जानकारी अदालत के आदेश के बाद ही दी गई, जबकि आयोग को यह डेटा वेबसाइट पर अपलोड करना चाहिए था।
कोर्ट ने कहा, `चुनाव आयोग दाखिल करे रिपोर्ट’
कोर्ट ने आयोग से कहा कि ड्राफ्ट और फाइनल लिस्ट के डेटा की तुलना कर रिपोर्ट गुरुवार तक दाखिल की जाए। प्रशांत भूषण ने कहा कि आयोग बटन दबाकर यह डेटा तुरंत दे सकता है, लेकिन पारदर्शिता की कमी के कारण ऐसा नहीं किया जा रहा। अदालत ने कहा कि यह पूरी कवायद चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास बढ़ाने के लिए की जानी चाहिए। सुनवाई अब ९ अक्टूबर, गुरुवार को होगी, जब याचिकाकर्ता नई दलीलों के साथ हलफनामे दाखिल करेंगे और निर्वाचन आयोग उस पर जवाब देगा।

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