मुख्यपृष्ठअपराध24 घंटे के भीतर दो इनामी बदमाश ढेर!

24 घंटे के भीतर दो इनामी बदमाश ढेर!

-लखनऊ में डेढ़ लाख का इनामी गुरुसेवक व मेरठ में 25 हजार का इनामी शहजाद मारे गए!

मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ

शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार, विकास, से ज्यादा कानून व्यवस्था को ठीक करते 8 वर्ष बीत गया लेकिन उत्तर प्रदेश में अपराध रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अभी तक अपराधियों का ताबड़तोड़ फुल-हाफ काउंटर, उस पर ऊपर से उसकी रसूख को रौंदने के लिए उसके आर्थिक साम्राज्य को ध्वस्त करने के लिये बुल्डोजर की कार्रवाई उत्तर प्रदेश सरकार की पहचान बन गयी है। पिछले 24 घण्टों में यूपी पुलिस ने कई मुठभेड़ किया। लेकिन दो मुठभेड़ों में अपराधी ढेर हो गये। राजधानी लखनऊ में रविवार देर शाम पुलिस और इनामी बदमाश गुरुसेवक के बीच मुठभेड़ हो गई। जवाबी फायरिंग में डेढ़ लाख रुपये के इनामी गुरुसेवक को पुलिस ने ढेर कर दिया। गुरुसेवक उन्नाव के एक कैब ड्राइवर के अपहरण और सीतापुर में उसकी हत्या के मामले में वांछित था। जानकारी के अनुसार, लखनऊ पुलिस की क्राइम टीम और पारा थाने की पुलिस आगरा एक्सप्रेस वे के जीरो प्वाइंट के सर्विस लेन चेकिंग कर रही थी। पुलिस ने रोकने का संकेत किया तो वह पुलिस पर हवाई फायरिंग करते हुए भागने लगे। जिस ओर बदमाश भाग रहे थे, उधर से पुलिस की दूसरी टीम आ गयी। खुद को घिरता देख गुरुसेवक ने पुलिस टीम पर 4 से 5 राउंड फायरिंग की, जिसमें क्राइम ब्रांच के एक इंस्पेक्टर की बुलेटप्रूफ जैकेट पर गोली लगी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में बदमाश गुरुसेवक घायल हो गया। पुलिस उसको अस्पताल ले गयी, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डीसीपी विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि गुरुसेवक पर हत्या, रेप और लूट के कई मुकदमे दर्ज थे।
एक अन्य घटना में सोमवार तड़के मेरठ में भी पुलिस और बदमाश के बीच मुठभेड़ हुई। जिसमें 25 हजार के इनामी अपराधी शहजाद उर्फ निक्की की मौत हो गई। शहजाद दो मासूम बच्चियों से दुष्कर्म के मामले में वांछित था। पुलिस के अनुसार, सुबह सरूरपुर थाना क्षेत्र में गश्त के दौरान पुलिस टीम ने उसे रोकने का इशारा किया, तो उसने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली लगने से शहजाद घायल हो गया, जिसे अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया। शहजाद के खिलाफ सात आपराधिक मुकदमे दर्ज थे, और उस पर 7 साल की बच्ची से दुष्कर्म का मामला भी था।बताते हैं कि परिवार ने शव लेने से मना कर दिया। शहजाद के पिता रहीसुद्दीन उर्फ पप्पू मूल रूप से मोहम्मदपुर शकिस्त गांव के निवासी हैं और पिछले 14 वर्षों से बहसूमा में रह रहे हैं। मां नसीमा ने बताया कि बेटे ने 9 साल की उम्र में पहली चोरी की थी, जिसके बाद उन्होंने खुद पुलिस को सौंपा था। बावजूद इसके वह कभी नहीं सुधरा। करीब 15 साल पहले मवी कलां (सरधना) की एक युवती से उसका निकाह हुआ था, लेकिन तीन माह बाद ही तलाक हो गया। परिवार ने उसे चल-अचल संपत्ति से बेदखल कर दिया था। नसीमा ने कहा ‘हमने अल्लाह से दुआ मांगी थी कि वह पुलिस के हवाले हो जाए, चाहे जिंदा या मुर्दा। आज उसकी मौत पर हमें कोई अफसोस नहीं है। उसने हमारे लिए तो बहुत पहले ही मर गया था।’ परिवार का कहना है कि उन्होंने कभी भी उसके किसी अपराध की पैरवी नहीं की। वे आज भी अपनी उसी बात पर अडिग हैं कि वह उनके लिए ‘नाम का बेटा’ नहीं रहा।”

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