मुख्यपृष्ठनए समाचारभूमिगत मेट्रो स्टेशन के बाहर ‘कबाड़ का अंबार’!

भूमिगत मेट्रो स्टेशन के बाहर ‘कबाड़ का अंबार’!

– परिसर में पड़े हैं बैरिकेड्स-सामान

– कई स्थानों पर सड़कें हो रही हैं जाम

– यात्रियों को हो रही है परेशानी

द्रुप्ति झा / मुंबई

भूमिगत मेट्रो की पूरी सेवा शुरू हो चुकी है। मगर कई स्थानों पर मेट्रो स्टेशन के बाहर कबाड़ का अंबार लगा हुआ है। ये कबाड़ मेट्रो निर्माण से संबंधित वे सामान हैं, जिन्हें वहीं छोड़ दिया गया है। इससे आम यात्रियों को तो परेशानी हो ही रही है, साथ ही वहां पर कबाड़ के कारण रास्ता संकरा हो जाने के कारण ट्रैफिक जाम की समस्या भी बढ़ गई है।
बता दें कि आधी सड़कों पर लगे बैरिकेड और पड़े सामान यातायात में बाधा डाल रहे हैं। मेट्रो प्रशासन या मनपा की उदासीनता के कारण वाहन चालकों और पैदल यात्रियों में नाराजगी है। इस मेट्रो सेवा से सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले नागरिकों को इसी मेट्रो परियोजना के कारण भीड़भाड़ का सामना करना पड़ रहा है। वर्ली में आचार्य अत्रे चौक, मुंबई सेंट्रल में जगन्नाथ शंकर शेठ स्टेशन और अंधेरी में मरोल नाका जैसे मेट्रो स्टेशनों के पास ऐसा ही नजारा है। इन सड़कों पर बड़ी मात्रा में यातायात जाम हो रहा है। आचार्य अत्रे चौक और मरोल नाका जैसे दूसरे चरण के स्टेशनों को यात्री सेवा के लिए खोले जाने के पांच महीने बाद भी इन स्टेशनों के परिसर का यह हाल है। नतीजतन, इस क्षेत्र में हर सुबह-शाम भारी ट्रैफिक जाम होता है। वर्ली नाका क्षेत्र में नागरिक परेशान हैं। महालक्ष्मी, कोस्टल रोड, लोअर परेल, दादर की ओर बहुत अधिक यातायात जाम होता है। मेट्रो के अधूरे काम के कारण ड्राइवरों को इस क्षेत्र में ५०० मीटर की यात्रा के लिए आधे से एक घंटे का वक्त अधिक लग रहा है।
चुनावी लाभ के लिए उद्घाटन
यात्री रोशन ठाकुर ने बताया कि सरकार की कोई भी परियोजना आम जनता के लिए सही तरीके से लागू नहीं की जाती है। सरकार जब हमें एक सुविधा उपलब्ध करवाती है तो उसके साथ कई मुसीबतें भी ले आती है। मेट्रो का उद्घाटन आम जनता के लिए नहीं, बल्कि चुनावी लाभ के लिए जल्दबाजी में कर दिया गया, जिसके भुक्तभोगी हम जैसे लोग हैं।

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