एक निराश है…

एक निराश है
एक अनुपस्थित
एक तीसरा आदमी है
जो न निराश है
न अनुपस्थित।
वह दुखी हो गया है
अपने जीवन में
असफल होकर।
इसके अलावा
वह जो चौथा आदमी है
वह तो चला गया है
तीर्थयात्रा पर
धर्मांध होकर।
ऐसे में
उबलता समय
उबल रहा है
पूरी तरह
सौ डिग्री
क्वथनांक पर।
और हम
जा रहे हैं
विनाश की ओर
आंख मूंदकर।।

-अन्वेषी

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