सूफी खान
पाकिस्तान, जो सोशल मीडिया पर अकसर सबूत बांटता फिरता है, अब उसी इंटरनेट पर अपनी बेइज्जती का तमाशा देख रहा है। अफगानिस्तान के साथ सीमा संघर्ष में पाकिस्तान को ऐसी चोट लगी है, जिसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। तालिबान के हाथों पाकिस्तान को जिस तरह की शिकस्त झेलनी पड़ी, उसने पूरे देश की राजनीति और सेना को सवालों के घेरे में ला दिया है। पाक के तथाकथित फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, जिन्होंने हाल ही में परमाणु हमले की धमकी देकर अपनी शक्ति दिखाने की कोशिश की थी, अब उन्हीं की छवि ताश के पत्तों की तरह बिखर रही है।
बीते हफ्तों में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर लगातार हिंसक झड़पें होती रहीं। दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने थे। गोलीबारी, रॉकेट हमले और तोपों की बौछार ने डूरंड लाइन के दोनों ओर तबाही मचा दी। आखिरकार, कतर और तुर्की की मध्यस्थता में शांति वार्ता का रास्ता निकला। रविवार को दोहा में दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की मुलाकात में सीजफायर पर सहमति बनी। खबर आई कि संघर्ष को रोकने पर दोनों पक्ष राजी हो गए हैं और आनेवाले दिनों में नई बैठकें होंगी। लेकिन ठीक इसके बाद वह हुआ, जिसने पाकिस्तान को झटका दे दिया।
कतर ने अपने आधिकारिक बयान से ‘डूरंड लाइन’ को अंतरराष्ट्रीय सीमा कहनेवाला हिस्सा हटा दिया। यह वही डूरंड लाइन है जो ब्रिटिश शासन के समय खींची गई थी और आज भी अफगानिस्तान इसे काल्पनिक मानता है। ये पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा झटका साबित हुआ है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कतर के शुरुआती बयान में इसे अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की सीमा बताया गया था। लेकिन अफगान जनता के गुस्से के बाद कतर सरकार ने अपनी वेबसाइट से यह जिक्र हटा दिया। यानी अब कतर के आधिकारिक दस्तावेज में पाकिस्तान को इस लाइन का कानूनी मालिक नहीं माना गया है। यह पाकिस्तान की कूटनीतिक सबसे बड़ी पराजय मानी जा रही है।
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री मुल्ला याकूब मुजाहिद ने दोहा से प्रेस कॉन्प्रâेंस में स्पष्ट कहा कि डूरंड लाइन पर कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान हमला करता है तो अफगान सेना पलटवार करेगी। यह बयान पाकिस्तान के लिए और अपमानजनक साबित हुआ क्योंकि वही तालिबान, जिसे पाकिस्तान कभी अपना रणनीतिक साथी मान कर चला था, अब उसकी ही सीमा पर चुनौती देने लगा है। यह बदलती शक्ति-संतुलन की तस्वीर पाकिस्तान के भीतर गहरी बेचैनी पैदा कर रही है।
