फिरोज खान
५२ वर्षीय पुलिस कांस्टेबल मुंबई के शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन में तैनात था और सायन स्थित प्रतीक्षा नगर कॉलोनी में रहता था। एक दिन वडाला ट्रक टर्मिनस में पुलिस को सूर्यवंशी की लाश मिली। लाश के सिर और हाथ पर गहरे जख्म के निशान थे और खून से लथपथ थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ऐसा कुछ नहीं आया कि सूर्यवंशी की हत्या हुई है। पुलिस ने खुदकुशी समझकर आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर जांच बंद कर दी। वक्त आहिस्ता-आहिस्ता गुजरता गया। सूर्यवंशी को मरे चार महीने बीत चुके थे। कहानी में नया मोड़ तब आया जब एक दिन सूर्यवंशी का भाई पुलिस स्टेशन पहुंचा और उसने पुलिस को बताया कि उसके भाई ने खुदकुशी नहीं की है, बल्कि उसका कत्ल किया गया है। भाई का बयान सुनकर पुलिस के कान खड़े हो गए। उसने पुलिस को कुछ क्लू दिए, जिससे पुलिस को उसकी बातों पर यकीन हो गया। फिर से बंद फाइल खोली गई। अब दोबारा नए तरीके से जांच शुरू हुई। कातिल तक पहुंचने के लिए पुलिस ने सूर्यवंशी के जान-पहचान और रिश्तेदारों से संपर्क किया। उनके द्वारा दिए गए बयान से पुलिस का शक पुख्ता हो गया। कातिल की पहचान हो गई, फिर भी पुलिस ने कातिल पर सीधे कार्रवाई करना मुनासिब नहीं समझा। कुछ दिनों तक उसके घर की रेकी की गई, ताकि कातिल की हलचल का पता चल सके। पुलिस ने कातिल को पकड़ने से पहले सारे सबूत और जानकारी इसलिए इकट्ठा की क्योंकि कातिल कोई और नहीं, बल्कि सूर्यवंशी की पत्नी और बेटा था। दोनों को हिरासत में लेकर पुलिस ने पूछताछ की तो पहले उन्होंने पुलिस को गुमराह करने की भरपूर कोशिश की, लेकिन पुलिस के पास उनके खिलाफ पूरी जानकारी होने के कारण दोनों टूट गए और उन्होंने अपना गुनाह कबूल कर लिया। उन्होंने पुलिस को बताया कि पैसों को लेकर अकसर दोनों का सूर्यवंशी से झगड़ा होता था। एक दिन उन्हें पता चला कि सूर्यवंशी ने अपना डेबिट कार्ड भाई को दे दिया है, तो वे आगबबूला हो गए। इसी बात को लेकर उनके बीच मारपीट शुरू हो गई। मारपीट के दौरान सूर्यवंशी का हाथ खिड़की के कांच से कटने के बाद खून बहने लगा। सूर्यवंशी को अस्पताल ले जाने की बजाय दोनों ने उन्हें घर में ही बंद रखा और खून रोकने की कोशिश नहीं की। खून ज्यादा बह जाने से सूर्यवंशी ने दम तोड़ दिया। इस वारदात को खुदकुशी का रूप देने के लिए एक सुसाइड नोट लिखकर उन्होंने मृतक के पास रख दिया। सुसाइड नोट में लिखा था कि उसकी मौत का जिम्मेदार कोई और नहीं वो खुद है। खैर, पुलिस ने मां-बेटे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
