मुख्यपृष्ठनए समाचाररेलवे ट्रैक पर मुलुक जाने का ‘मैराथन’!

रेलवे ट्रैक पर मुलुक जाने का ‘मैराथन’!

-गांव जाने के लिए पटरियों पर ही दौड़ पड़े यात्री

-कई सौ मीटर दूर जाकर पकड़ी ट्रेन

-रेलवे प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

जेदवी / मुंबई

दिवाली और छठ पूजा के लिए बिहार जाने वाली ट्रेनों में सबसे ज्यादा भीड़ है। मुंबई से बिहार जाने वाली लगभग सभी ट्रेनें खचाखच भरी हुई हैं और टिकट मिलना बहुत मुश्किल है। रेलवे के सारे दावों की पोल खुल गई है। हर तरफ अफरातफरी का माहौल है। हालत इतनी गंभीर है कि यात्री ट्रेन पकड़ने के लिए रेलवे ट्रैक पर दौड़ रहे हैं, मानो मुलुक जाने का कोई मैराथन चल रहा हो। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कल्याण रेलवे स्टेशन पर ऐसा नजारा देखने को मिला है। वहां यात्री दिवाली के दौरान अपने गांव जाने के लिए जान हथेली पर लेकर रेलवे ट्रैक पर दौड़ पड़े। बूढ़े, जवान, महिलाएं बच्चे सब दौड़ रहे थे। इस दौरान एक भी सुरक्षाकर्मी वहां नजर नहीं आया। जबकि दुर्घटना होने के बाद रेलवे प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं।
रेलवे के दावे नाकाफी
दिवाली और छठ पूजा के लिए १२,००० विशेष ट्रेनें चलाने की घोषणा की गई थी, जो नाकाफी साबित हो रही है। मुंबई सेंट्रल, बांद्रा टर्मिनस और एलटीटी जैसे प्रमुख स्टेशनों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रेलवे पुलिस बल और अतिरिक्त कर्मचारियों को तैनात किया गया है, लेकिन हालत इस के विपरीत है। स्टेशनों पर सैकड़ों यात्री टिकट खिड़की और काउंटर के बाहर लाइन में खड़े हैं, जबकि ऑनलाइन वेटिंग लिस्ट ३०० से ऊपर पहुंच चुकी है।
दलाल गिरोह सक्रिय
दलालों का गिरोह सक्रिय है। वे ४०० रुपए के टिकट को १,५०० से २,००० में बेच रहे हैं। सुरक्षा और सफाई दोनों गायब हैं। भीड़ इतनी कि सांस लेना मुश्किल हो रहा है। ट्रेन में सीट नहीं, फिर भी लोग किसी तरह घुस रहे हैं। बच्चे और महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। प्लेटफॉर्म पर रुक-रुककर झगड़े और धक्का-मुक्की हो रही है। इस बारे में सेंट्रल रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्निल धनराज नीला का कहना है कि लोगों से अनुरोध है कि सोशल मीडिया पर भ्रम न पैâलाएं। रेलवे प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा व सुविधा का पुख्ता इंतजाम कर रहा है।

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