जेदवी
मुंबई मनपा चुनाव के मद्देनजर वोटरों को खुश करने के लिए जल्दबाजी में मेट्रो-३ की शुरुआत कर दी गई है। हालांकि, शुरू होने के बाद से ही लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मुंबई की पहली पूरी तरह से भूमिगत मेट्रो लाइन है, जो आरे से कफ परेड तक चलती है। यह यात्रियों के लिए मुसीबत बन गई हैं।
मुख्य परेशानियां
लोगों की शिकायत है कि मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी का अभाव सबसे बड़ी समस्या है, क्योंकि मेट्रो स्टेशन और सुरंग के अंदर मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करता है। जिस के कारण जनसंपर्क टूट जाता है। बताया जाता हैं कि संचार में बाधा से लोग मेट्रो के अंदर फोन कॉल नहीं कर पाते, जिससे आपातकालीन स्थिति में भी मुश्किल हो सकती है।
डिजिटल भुगतान में दिक्कत
नेटवर्क न होने से यूपीआई और अन्य ऑनलाइन भुगतान के तरीके काम नहीं करते, जिससे यात्रियों को टिकट खरीदने में परेशानी होती है। टिकट के लिए यात्रियों को संघर्ष करना पड़ रहा है। टिकट के लिए केवल नकद पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे लंबी कतारें लग जाती हैं। इसके अलावा खुल्ले पैसे की कमी के कारण टिकट काउंटरों पर यात्रियों को दिक्कत हो रही है। मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने कुछ स्टेशनों पर मुफ्त वाई-फाई की सुविधा दी है, लेकिन यह एक स्थाई समाधान नहीं है।
तकनीकी खराबी
मेट्रो लाइन में कई बार तकनीकी खराबी आई है, जिससे ट्रेनें खाली करवानी पड़ीं और सेवा में देरी हुई। व्यस्त समय में होने वाली तकनीकी खराबी से यात्रियों को घंटों तक परेशानी हो रही है। स्टेशनों के बाहर भी समस्याओं की कमी नही है।
अधूरा निर्माण कार्य
कई मेट्रो स्टेशनों के बाहर सड़क का काम अधूरा है, जिससे ट्रैफिक जाम होता है और पैदल चलने वालों को असुविधा होती है। कुछ स्टेशनों से बाहर निकलने पर आगे जाने के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। कालबादेवी में देरी का कारण इलाके में निर्माण में देरी है जिससे परियोजना प्रभावित हुई हैं।
क्या कहते हैं यात्री
प्रियंका सिंह ने बताया कि वह मेट्रो-३ के शुरू होने का बेसब्री से इंतजार कर रही थी लेकिन यात्रा के दौरान होने वाली परेशानी से वह निराश हैं। जबकि प्रकाश मोरे का कहना है कि समय बचने और सुविधा के चलते अधिक रूपये खर्च करने को तैयार हैं लेकिन यहां के हालत गंभीर हैं। यात्रियों का कहना हैं कि जो समस्याएं हो रही हैं उन्हें देख कर ऐसा लगता है कि यह जल्दबाजी में उद्घाटन कर दिया गया है। दूरसंचार कंपनियों को मिलकर नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या का स्थाई समाधान निकालना चाहिए।
नकद रहित भुगतान को बढ़ावा देने के लिए स्टेशनों पर डिजिटल बुनियादी ढांचे में सुधार करना चाहिए। तकनीकी समस्याओं को कम करने के लिए मेट्रो के संचालन और रखरखाव को और बेहतर बनाने की आवश्यकता है। यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशनों के बाहर परिवहन के अन्य साधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
रिसाव का मुद्दा
मई २०२५ में भारी बारिश के कारण आचार्य अत्रे चौक स्टेशन में पानी घुस गया था, हालांकि एमएमआरसी ने सुरंग में रिसाव की बात से इनकार किया था। विभिन्न स्टेशनों पर जल रिसाव और बाढ़ की घटनाएं सामने आईं। इन घटनाओं ने परियोजना की निर्माण गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे की मजबूती पर सवाल खड़े किए हैं। २६ मई २०२५ को भारी बारिश के दौरान स्टेशन में जल भराव हुआ। पास के स्टॉर्मवॉटर ड्रेन से लगभग ११ लाख लीटर पानी रिसा। एमएमआरसी ने इसे निर्माण दोष मानते हुए ठेकेदार पर १० लाख का जुर्माना लगाया है।
