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दिवाली की ‘रोशनी’ में दमघोंटू धुआं से घुटने लगी मुंबई … अब राजधानी दिल्ली की राह पर मायानगरी!

हर सांस शरीर में उतार रही जहर की डोज
बीकेसी, देवनार, अंधेरी, विले पार्ले,
मझगांव में एक्यूआई ‘खतरे की सीमा’ पार
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
दिवाली की चमक के बीच मुंबई की हवा अब मौत का धुआं उगल रही है। त्योहार की रोशनी के नीचे मायानगरी दमघोंटू धुंध में कैद हो चुकी है और अब दिल्ली की राह पर तेजी से बढ़ रही है। बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में वायु गुणवत्ता सूचकांक ३३५ तक जा पहुंचा है, जबकि देवनार, अंधेरी, विले पार्ले और मझगांव जैसे इलाकों में भी एक्यूआई ‘खतरे की सीमा’ पार कर चुका है। इस वजह से मुंबई में हर सांस अब शरीर में जहर की डोज भर रही है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यह जहरीली हवा सांस, दिल और त्वचा के मरीजों के साथ ही बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए घातक साबित हो सकती है। इसके बावजूद महायुति सरकार और मुंबई मनपा प्रशासन का मौन जनता के गले नहीं उतर रहा है। ऐसे में लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या सरकार की ‘स्वस्थ मुंबई’ की यही गारंटी थी?
उल्लेखनीय है कि विशेषज्ञों का कहना है कि दिवाली के दौरान पटाखों का अंधाधुंध इस्तेमाल, गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, कचरा जलाने और मौसम में ठहराव की वजह से प्रदूषण का स्तर अचानक खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। मुंबई में बीकेसी, देवनार, अंधेरी ईस्ट और मझगांव जैसे इलाकों में हवा में पीएम २.५ और पीएम १० कणों की मात्रा सामान्य से पांच गुना ज्यादा दर्ज की गई है।
बीमारियों को बना सकती है गंभीर
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इस प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और दिल व सांस की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों पर पड़ रहा है। लगातार बढ़ते पीएम २.५ और पीएम १० कण फेफड़ों की क्षमता घटा रहे हैं और खांसी, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जी जैसी बीमारियों को और गंभीर बना रहे हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार, हवा में मौजूद विषैले तत्व त्वचा की नमी सोख लेते हैं, जिससे जलन, खुजली और संक्रमण की समस्या तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्थिति यही रही तो मुंबई का वायु प्रदूषण जल्द ही दिल्ली के स्तर को भी पार कर सकता है।

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