कविता श्रीवास्तव
राजस्थान यानी राजाओं की भूमि। यहां राजों-राजवाड़ों की समृद्ध विरासत का खजाना है। अब इसी प्रांत में भूमि के नीचे प्राकृतिक सोने के बड़े खजाने का पता लगा है। राजस्थान के आदिवासी बहुल बांसवाडा जिले के कांकरिया गांव में तीसरी स्वर्ण अयस्क खदान का पता चला है। यहां २२२ टन शुद्ध सोने सहित ११ करोड़ टन से अधिक अयस्क का अनुमान है। इससे पहले भी बांसवाड़ा के घाटोल में स्थित जगपुरिया और भूकिया में सोने की खानों की पुष्टि हो चुकी है। रिपोर्ट है कि यहां खदानों में इतना सोना है, जिसमें प्रदेश को समृद्धि के शिखर पर पहुंचाने का सामर्थ्य है। इससे भारत की २५ प्रतिशत स्वर्ण मांग पूरी हो सकती है। भूवैज्ञानिकों को कांकरिया में लगभग ३ किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में स्वर्ण अयस्क के संभावित भंडार के पुख्ता संकेत मिले हैं। सोने का खजाना मिलने से न केवल यह जिला, बल्कि पूरा राजस्थान ही चर्चा में है। इसके साथ ही, बांसवाड़ा जिला अब देश में ‘सोने के गढ़’ के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। राजस्थान प्राचीन युग से भारतीय संस्कृति, शास्त्रीय परंपरा और देसी सभ्यता को सहेजे हुए अपनी विशिष्टता को संवारते आया है। राजपूताना शौर्य का प्रदेश है राजस्थान। कह सकते हैं कि इसी राजस्थान को चमकाने-दमकाने के लिए अब यहां और भी खजाना मिला है। यह प्रकृति का खजाना है। यह राजस्थान को और भी महत्वपूर्ण बनाएगा। राजस्थान की पहचान वैसे भी वहां की संस्कृति, कला और जीवन शैली की विशिष्ट चमक और आकर्षण से है। इनमें पारंपरिक वेशभूषा, जीवंत संगीत, रंगीन शिल्प और अनूठे रीति-रिवाज शामिल हैं। राजस्थान की सुंदरता और जीवंतता दुनियाभर में प्रसिद्ध है। राजस्थान का महत्व उसकी समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत में भी है। ऐतिहासिक वास्तुकला, किलों, महलों, जीवंत संस्कृति और पारंपरिक नृत्यों के लिए राजस्थान प्रसिद्ध है। इसके अलावा, थार रेगिस्तान, अरावली पहाड़ियों जैसे विविध परिदृश्य और शानदार राजस्थानी व्यंजन भी राजस्थान की विशेषताओं में शामिल है। शैक्षणिक, सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी राजस्थान बहुत महत्वपूर्ण प्रदेश है। बांसवाड़ा जिले में स्वर्ण की खान मिलने से इलेक्ट्रॉनिक, पेट्रोलियम, पेट्रोकेमिकल्स, बैटरी और एयर बैग व कई उद्योग पैâलेगा। रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। आम भारतीयों की तरह राजस्थानियों को भी सोना बहुत पसंद है। उनमें माथे, कान, गले, बाजू, उंगलियों, कमर और पैरों के आभूषणों पर कुंदन, मीनाकारी और पारंपरिक डिजाइनें सोने पर उकेरी दिखती हैं। माथे के लिए बोरला, कानों के लिए झुमका और पीपल पत्रा, गले के लिए तिमणिया और तुलसी, बाजू के लिए कड़ा और गजरा, उंगलियों के लिए अंगूठी और छल्ला, कमर के लिए कंदोरा और करगनी और पैरों के लिए पायल और पायल की कड़ियां आदि राजस्थानी स्त्रियों में खूब लोकप्रिय है। बहुत बड़ी मात्रा में राजस्थान को सोना मिलने से राजस्थानी निश्चित ही प्रसन्न होकर कहेंगे, ‘पधारो म्हारे देश…।’
