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डाला छठ पर मिनी बिहार सरीखा दिखी काशी, लाखों व्रतियों ने दिया अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य

छठी मईया के गीत के साथ आस्था और अध्यात्म से नहाई गंगा के सभी घाटों पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब

उमेश गुप्ता / वाराणसी

लोक आस्था के चार दिवसीय महापर्व डाला छठ के तीसरे दिन सोमवार को पूरी काशी आस्था और श्रद्धा से सराबोर हो उठी। धुंध और हल्की बदली के बीच लाखों व्रती महिलाओं ने अपने परिजनों के साथ गंगा घाटों पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। घाटों से लेकर तालाबों और सरोवरों तक श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

सुबह से ही श्रद्धालु घरों में पूजन की तैयारी में जुटे थे। दोपहर बाद गाजे-बाजे, गीत-संगीत और उत्साह के बीच महिलाएं सिर पर पूजन सामग्री से भरी ‘डाल दउरी’ रखकर गंगा तट की ओर रवाना हुईं। लाल और पीले वस्त्रों में सजे श्रद्धालु छठ मैया के पारंपरिक गीत गाते हुए जब घाटों पर पहुंचे, तो पूरा वातावरण भक्ति और उल्लास से गूंज उठा।

36 घंटे के निर्जला व्रत के बाद व्रती महिलाओं ने कमर भर पानी में खड़े होकर अस्त होते भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य दिया। व्रतियों के साथ उनके परिजनों ने भी घुटनों तक जल में उतरकर सूर्यदेव से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

शहर के प्रमुख घाटों दशाश्वमेध, अस्सी, राजघाट, प्रह्लाद घाट, पंचगंगा घाट, नमो घाट, ब्रह्मा घाट, गाय घाट समेत आसपास के सभी तटों पर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ रही। सबसे अधिक जनसैलाब दशाश्वमेध और अस्सी घाट पर देखा गया। घाटों के किनारे बच्चों और युवाओं में भी आस्था और उत्साह चरम पर था।
व्रतियों ने घाटों पर पहुंचकर मिट्टी की वेदियों पर हल्दी से शुभ प्रतीक बनाए, गंगा मईया और सूर्यदेव को दीप अर्पित किए और छठ मैया के पारंपरिक गीतों के बीच अर्घ्य विधान पूरा किया। गंगा तट पर झिलमिलाते दीप, जल में प्रतिबिंबित श्रद्धा और आसमान में गूंजते भक्ति गीत आध्यात्मिक छटा बिखर रहा था। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से एनडीआरएफ और जल पुलिस की 11 टीमें सुरक्षा व्यवस्था में मुस्तैद रहीं। घाटों पर साफ-सफाई और रोशनी की विशेष व्यवस्था की गई थी।

बरेका क्षेत्र स्थित सूर्य सरोवर में भी पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ देखने को मिली। दोपहर बाद से ही व्रत करने वाली महिलाओं का हुजूम सरोवर की ओर उमड़ पड़ा। जैसे ही घड़ी में शाम 4 बजकर 20 मिनट हुए, श्रद्धालु सामूहिक रूप से सरोवर में उतरकर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने लगे।

व्रती महिलाएं परंपरागत पूजन सामग्री दौरा, फल, सूप और दीप आदि के साथ पहुंचीं। पानी में खड़े होकर उन्होंने भगवान भास्कर के समक्ष परिवार की सुख-समृद्धि, संतानों की दीर्घायु और आरोग्य की कामना की। इससे पहले महिलाओं ने पूजा मंत्रोच्चार के साथ छठी माई का स्मरण किया और विधि-विधान से अनुष्ठान संपन्न किया।

परिवार के सदस्य भी व्रती महिलाओं के साथ मौजूद रहे और श्रद्धा के साथ अर्घ्य अर्पित किया। पूरे सरोवर परिसर में भक्ति गीतों की धुन गूंजती रही और चारों ओर आस्था एवं उत्साह का वातावरण रहा।भीड़ बढ़ने के साथ ही प्रशासन और सुरक्षा बलों ने कमान संभाल ली थी। पुलिस तथा स्वयंसेवक लगातार लोगों को सुरक्षित रूप से जल में उतरने और बाहर निकलने में मदद करते रहे। चिकित्सा सुविधा और प्रकाश व्यवस्था का भी इंतज़ाम किया गया था।

कचहरी क्षेत्र में वरुणा नदी के शास्त्री घाट पर भी छठ पूजा की धूम देखी गई। इस दौरान शास्त्री घाट को आकर्षक ढंग से फूलों, रंगोली और दीपों से सजाया गया था। शाम होते ही पूरा वातावरण छठ मैया के गीतों और भक्ति भजनों से गूंज उठा।महिलाओं ने सिर पर पूजन सामग्री से भरी दउरी लेकर घाट की ओर प्रस्थान किया और परिवार के साथ अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया।
पूरे कार्यक्रम में भक्ति और सामूहिकता की अनूठी झलक देखने को मिली। पुरुष, महिलाएं और बच्चे सभी पारंपरिक परिधानों में शामिल हुए। वरुणा नदी के शास्त्री घाट किनारे दीपों की रोशनी जल में झिलमिलाती रही, जिससे माहौल में आध्यात्मिक छटा बिखर गई।

महापर्व का समापन मंगलवार तड़के उदयाचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगा। इसके साथ ही चार दिन चलने वाला यह महा व्रत पूर्ण होगा।

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