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नासिक कुंभ का भूमिपूजन… अजीत दादा ने बनाई दूरी!

-पुणे जमीन मामले में सीएम से नाराज हैं डिप्टी सीएम

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है। नासिक कुंभ के लगभग छह हजार करोड़ रुपए के विकास कार्यों का शुभारंभ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों गुरुवार को हुआ, लेकिन इस भव्य कार्यक्रम से उप मुख्यमंत्री अजीत पवार की गैरहाजिरी ने सत्ताधारी महायुति में नई हलचल पैदा कर दी है। यहां धार्मिक आस्था का माहौल तो बना, पर राजनीतिक मंच पर महायुति की एकता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस समारोह में मुख्यमंत्री फडणवीस, उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, मंत्री गिरीश महाजन, माणिकराव कोकाटे, और दादा भुसे व अन्य मंत्री मौजूद थे। मगर राज्य के दूसरे उप मुख्यमंत्री अजीत पवार दिखाई नहीं दिए।
राजनीतिक गलियारों में अब सवाल उठने लगे है कि क्या पुणे जमीन घोटाले के मुद्दे पर अजीत दादा की नाराजगी अब सार्वजनिक रूप से सामने आ रही है? उधर इस समारोह में फडणवीस ने कहा कि मीडिया और नेता यह न देखें कि काम किस ठेकेदार को दिया गया, बल्कि काम देखें। फडणवीस का यह बयान कई लोगों को ठेकेदार वाली राजनीति पर परोक्ष प्रहार जैसा लगा। यह बयान अजीत पवार से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, पुणे के बहुचर्चित जमीन प्रकरण को लेकर भाजपा और अजीत पवार गुट के बीच खटास बढ़ी हुई है और फडणवीस का यह वक्तव्य उसी संदर्भ में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अजीत पवार का इस कार्यक्रम से दूरी बनाना महज ‘व्यस्तता’ नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश है। एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अजीत दादा हाल ही में पुणे के जमीन प्रकरण को लेकर नाराज हैं। उन्होंने सरकार के रवैये से असहमति जताई थी। अब नासिक कुंभ कार्यक्रम से दूरी बनाना उसी असंतोष का इशारा हो सकता है। वहीं अजीत पवार गुट की चुप्पी और दूरी ने महायुति में दरार के संकेत दे दिए हैं।
भूमि विवाद का असर
अजीत पवार गुट में कई नेता यह महसूस कर रहे हैं कि सरकार में उनका ‘वजन’ कम हो रहा है। वहीं भाजपा खेमे में यह धारणा है कि पुणे भूमि विवाद में अजीत पवार गुट की छवि प्रभावित हो रही है।

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